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भोपाल की काली बाड़ी में दुर्गा पूजा का 70वां वर्ष, सुनहरी प्रतिमा और प्रकृति थीम बनी आकर्षण

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Digital Desk
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📍 भोपाल
भोपाल की काली बाड़ी में दुर्गा पूजा का 70वां वर्ष, सुनहरी प्रतिमा और प्रकृति थीम बनी आकर्षण

17 अक्टूबर 2026। राजधानी भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित काली बाड़ी में दुर्गा पूजा का उत्सव इस वर्ष खास अंदाज में मनाया जा रहा है। शहर का सबसे पुराना बंगाली संगठन अपनी 70वीं शारदीय दुर्गा पूजा का आयोजन कर रहा है। इस बार उत्सव में देवी दुर्गा की सुनहरी प्रतिमा, प्रकृति पर आधारित पंडाल और कोलकाता से आए पारंपरिक ढाक वादकों की प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण हैं।

70वें वर्ष के इस आयोजन में बंगाली परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। पंडाल को प्रकृति थीम पर सजाया गया है, वहीं देवी दुर्गा और उनके परिवार की प्रतिमाओं को विशेष सुनहरी सजावट से भव्य रूप दिया गया है।

सुनहरी सजावट और प्रकृति थीम ने बढ़ाई उत्सव की भव्यता
इस वर्ष काली बाड़ी में देवी दुर्गा की सजावट में पारंपरिक सफेद 'डाकेर साज' के स्थान पर सुनहरे रंग का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमा के आभूषणों और सजावट में गोल्डन थीम को प्रमुखता दी गई है, जो आयोजन के 70वें वर्ष की विशेषता को दर्शाती है।

काली बाड़ी एसोसिएशन के महासचिव सलिल चटर्जी के अनुसार, इस बार दुर्गा पूजा की थीम 'प्रकृति' रखी गई है। देवी की सजावट से जुड़ी सामग्री विशेष रूप से कोलकाता से मंगवाई गई है। इसके अलावा, पूजा की पारंपरिक विधियों को जीवंत बनाए रखने के लिए कोलकाता से पुरोहितों, ढाक वादकों और कलाकारों को भी भोपाल बुलाया गया है।

महाषष्ठी से शुरू हुआ छह दिवसीय उत्सव
छह दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत शुक्रवार को महाषष्ठी के अवसर पर सुबह की प्रार्थना और शाम को देवी वरण समारोह के साथ हुई। इसके बाद महा सप्तमी के अनुष्ठानों में स्नान, नवपत्रिका प्रवेश, पुष्पांजलि और सामूहिक भोग वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

19 अक्टूबर को महाअष्टमी के अवसर पर विशेष संधि पूजा होगी। वहीं, 20 अक्टूबर को महानवमी पर कुमारी पूजा, महाबलि और पारंपरिक यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इन धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

धुनुची नृत्य और ढाक की गूंज से गूंज रहा पंडाल
काली बाड़ी में हर शाम संध्या आरती के साथ पारंपरिक धुनुची नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। ढाक की गूंज और बंगाली धार्मिक संगीत उत्सव के माहौल को खास बना रहे हैं। कोलकाता से आए कलाकारों की मौजूदगी इस आयोजन को बंगाल की पारंपरिक दुर्गा पूजा का स्वरूप दे रही है।

धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भी विशेष स्थान दिया गया है। आयोजन में संगीतमय नृत्य-नाटिका, 'कृष्ण बाल लीला और रास लीला' तथा ओपन स्टेज टैलेंट शो जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ श्रद्धालुओं के लिए मनोरंजन की व्यवस्था भी की गई है।

भोग के लिए अग्रिम पंजीकरण की पहल
इस वर्ष संगठन ने भोग अर्पित करने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए अग्रिम पंजीकरण की व्यवस्था भी की। इसका उद्देश्य आयोजन को बेहतर ढंग से संचालित करना और भक्तों की भागीदारी को व्यवस्थित बनाना है।

काली बाड़ी में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भोपाल के बंगाली समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। सात दशक से जारी इस उत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को बंगाली रीति-रिवाजों, संगीत, नृत्य और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

21 अक्टूबर को सिंदूर खेला और प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन
दुर्गा पूजा उत्सव का समापन 21 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर होगा। इस दिन देवी वरण के बाद पारंपरिक सिंदूर खेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर विजयादशमी की शुभकामनाएं देंगी।

इसके बाद शाम को देवी दुर्गा की प्रतिमा का भव्य विसर्जन जुलूस निकाला जाएगा। इस तरह काली बाड़ी में छह दिनों तक चलने वाला दुर्गोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक उत्साह के साथ संपन्न होगा।

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