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अभाविप के ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ आह्वान पर भोपाल में विद्यार्थी हुंकार प्रदर्शन, हजारों विद्यार्थियों ने लोकतंत्र की रक्षा का किया उद्घोष

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Digital Desk
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📍 भोपाल
अभाविप के ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ आह्वान पर भोपाल में विद्यार्थी हुंकार प्रदर्शन, हजारों विद्यार्थियों ने लोकतंत्र की रक्षा का किया उद्घोष

लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन बैलेट से होता है, भीड़तंत्र से नहीं; संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना आवश्यक: अभाविप

विद्यार्थियों ने रैली के माध्यम से दिया लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश, खुले मंच से छात्र नेताओं ने रखे अपने विचार

24 अक्टूबर 2026। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), भोपाल महानगर द्वारा आज 24 अक्टूबर 2026 को राजधानी भोपाल के अटल पथ, टी.टी. नगर में ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ आह्वान के अंतर्गत विद्यार्थी हुंकार प्रदर्शन का आयोजन किया गया। दोपहर 1 बजे आयोजित इस प्रदर्शन में प्रमुख रूप से अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी एवं मध्यभारत प्रांत के प्रांत मंत्री श्री केतन चतुर्वेदी उपस्थित रहे। प्रदर्शन में विद्यार्थियों ने सहभागिता कर लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

प्रदर्शन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा रैली निकालकर ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ का संदेश दिया गया। रैली के माध्यम से यह आह्वान किया गया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था संविधान, कानून और जनता के मताधिकार पर आधारित है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लाने तथा अराजकता के माध्यम से राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करने के प्रयास स्वीकार्य नहीं हैं। निर्वाचन प्रक्रिया अथवा किसी भी संवैधानिक व्यवस्था से संबंधित शिकायतों का समाधान संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।

रैली के पश्चात खुले मंच का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न छात्र नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। छात्र नेताओं ने लोकतंत्र की महत्ता, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। खुले मंच के माध्यम से विद्यार्थियों से लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जागरूक रहने और राष्ट्रहित में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सोलंकी ने कहा कि राष्ट्रवादी विचार के युवाओं की ताकत का उदाहरण दिया है कि एक समय जिनके कार्यकाल में मध्य प्रदेश दुर्व्यवस्था का उदाहरण था, स्कूल-कॉलेज में पढ़ते समय रात का होमवर्क शाम को करने के लिए चिमनी में पढ़ना पड़ता था। आज वही मध्य प्रदेश डेवलप्ड स्टेट्स की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका उदाहरण है कि ऐसे व्यक्ति, जो राम के विरोधी रहे हैं, जो राम मंदिर के विरोधी रहे हैं, जो सनातन के विरोधी रहे हैं, जो राष्ट्र के विरोधी रहे हैं, ऐसे दिग्विजय सिंह को भी आज सनातन यात्रा करना पड़ रही है। यह राष्ट्रवादी विचार के युवाओं की ताकत है।

उन्होंने नेहा बोरा के लिए कहा कि उसने अपने पिता से 10 साल तक बात नहीं की। जेएनयू में पढ़ते-पढ़ते उसका इतना ब्रेनवॉश किया कि वह भारत के लिए क्या बोलती है, यह आप सभी ने सुना है।नेहा बोरा ने कहा कि बांग्लादेश से प्रेरणा लेना चाहिए लेकिन भारत का युवा नेहा बोरा की तरह नहीं सोचता है और भारत का युवा कभी भारत को बांग्लादेश नहीं बनने देगा।

अभाविप के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि - आज कुछ लोग भारत को बांग्लादेश बनाने का स्वप्न देख रहे देश को अराजकता की ओर ढकेलने का षडयंत्र रच रहे हैं, परन्तु भारत की युवा शक्ति इनके षड्यंत्रों को भलीभांति समझती है। राहुल गांधी अपने मानसिक विक्षिप्तता का परिचय देते हुए युवाओं के झूठे प्रतिनिधि बने घूम रहे हैं l आज हाथ में तिरंगा लेकर जंतर मंतर पर ढोंग रचने वाले कश्मीर में जब आतंकियों द्वारा तिरंगा जलाया गया तब कहाँ थे ? जो नेहा बोरा आज ढोंग करती घूम रही है ये उसी AISA संगठन की अध्यक्ष हैं जो आतंकवादियों के समर्थन में मार्च निकालता है। आज भारत के अंदर चोर-चोर मौसेरा भाइयों की जमात इकट्ठी हुई है जो भारत के अंदर अराजकता फैलाने का प्रयास कर रही है, लोकतांत्रिक व्यवस्था को खंडित करने का प्रयास कर रही है। परंतु भारत की युवा पीढ़ी एवं नागरिकों की आस्था यह भारत की संवैधानिक व्यवस्था पर अडिग है, और वह इन देशद्रोहियों के साथ सपनों को कभी साकार नहीं होने देंगे।

अभाविप का मानना है कि भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास, मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर आधारित है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक एवं वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान संवैधानिक मर्यादाओं के अंतर्गत ही होना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

अभाविप सदैव विद्यार्थियों के बीच राष्ट्र प्रथम की भावना, लोकतांत्रिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के लिए कार्य करती रही है। भोपाल में आयोजित विद्यार्थी हुंकार के माध्यम से युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान तथा राष्ट्रहित के प्रति सजग रहने का आह्वान किया गया।

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