ब्रह्मोस-NG, 1,500 किलोमीटर तक मार करने वाले संभावित संस्करण और हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II पर काम जारी, वैश्विक बाजार में भी बढ़ रही दिलचस्पी
24 अक्टूबर 2026। भारत और रूस की संयुक्त रक्षा परियोजना ब्रह्मोस अब अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता, रेंज और उपयोगिता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। पिछले साल भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान ब्रह्मोस के इस्तेमाल के बाद इस मिसाइल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई है। कंपनी अब मौजूदा प्रणालियों को अपग्रेड करने के साथ नई पीढ़ी के संस्करण विकसित करने पर भी ध्यान दे रही है।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और प्रबंध निदेशक जयतीर्थ जोशी के अनुसार, मिसाइल के परिचालन और तकनीकी मानकों में सुधार किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य बदलती सैन्य जरूरतों के अनुरूप ऐसे संस्करण विकसित करना है, जिन्हें विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और जमीन आधारित प्रणालियों से इस्तेमाल किया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी चर्चा
ब्रह्मोस को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमलों में इस्तेमाल किया था। यह सैन्य अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद मई 2025 में शुरू किया गया था।
भारत के अनुसार, अभियान के दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों ने अपनी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम के बाद कई देशों की ओर से मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, युद्ध में इसकी सफलता और मिसाइलों को रोकने की क्षमता से जुड़े दावों का स्वतंत्र आकलन अलग विषय है।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की कंपनी NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया का संयुक्त उद्यम है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों के नाम पर रखा गया है।
ब्रह्मोस-NG और लंबी दूरी वाले संस्करण पर काम
ब्रह्मोस का एक प्रमुख प्रस्तावित अपग्रेड ब्रह्मोस-NG यानी नेक्स्ट जेनरेशन संस्करण है। इसे मौजूदा मिसाइल की तुलना में हल्का और अधिक कॉम्पैक्ट बनाने की योजना है। इससे भारतीय वायु सेना के तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमानों पर भी इसे तैनात करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। कंपनी की योजना के अनुसार, इसका प्रोटोटाइप 2027-28 तक सामने आ सकता है।
मौजूदा ब्रह्मोस लगभग मैक 2.8 से 3 की गति से उड़ सकती है। इसके शुरुआती संस्करण की घोषित रेंज 290 किलोमीटर थी, जबकि बाद के संस्करणों में इसे बढ़ाया गया है। 2023 में भारतीय वायु सेना ने Su-30MKI लड़ाकू विमान से लगभग 450 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस-A संस्करण का परीक्षण किया था।
कंपनी लंबी दूरी तक मार करने वाले एक संभावित संस्करण पर भी काम कर रही है, जिसकी प्रस्तावित रेंज 1,500 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि, यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है और इसकी वास्तविक क्षमता तथा विकास की समयसीमा की पुष्टि आवश्यक है।
हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II की तैयारी
भविष्य की योजनाओं में ब्रह्मोस-II भी शामिल है। इस प्रस्तावित हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए स्क्रैमजेट इंजन जैसी उन्नत तकनीकों पर विचार किया जा रहा है। इसका लक्ष्य मैक 5 या उससे अधिक गति हासिल करना है। अभी इसे विकसित करने में कई तकनीकी चुनौतियां हैं और इसकी परिचालन तैनाती को लेकर कोई निश्चित समयसीमा नहीं मानी जानी चाहिए।
निर्यात बाजार में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा
ब्रह्मोस का पहला प्रमुख विदेशी ग्राहक फिलीपींस बना, जिसने 2022 में लगभग 375 मिलियन डॉलर का समझौता किया था। भारत ने वियतनाम सहित अन्य देशों के साथ भी मिसाइल निर्यात को लेकर समझौते और बातचीत आगे बढ़ाई है। इंडोनेशिया समेत कई देशों ने इस प्रणाली में रुचि दिखाई है।
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस अपनी उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार कर रही है। कंपनी की उत्पादन सुविधाएं हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ में हैं।
भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। ऐसे में ब्रह्मोस परियोजना देश की रक्षा तकनीक, स्वदेशी विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, इसकी भविष्य की सफलता नई तकनीकों के विकास, समय पर उत्पादन और निर्यात समझौतों को लागू करने पर निर्भर करेगी।