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गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का कल अंतिम दिन

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Digital Desk
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📍 भोपाल
गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का कल अंतिम दिन

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा प्रदेश के 208 वृंदावन ग्रामों में आयोजित की जा रही  प्रतियोगिता

दुग्ध उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को ₹1 लाख, ₹50 हजार और ₹25 हजार की मिलेगी पुरस्कार के रूप में राशि

30 अक्टूबर 2026। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, उन्नत देशी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहित करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार प्रतियोगिता का अंतिम दिन है। यह प्रतियोगिता पहले साल चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में आयोजित की जा रही है। 27 अक्टूबर से शुरू हुई प्रतियोगिता 31 अक्टूबर तक चलेगी। प्रतियोगिता में सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। प्रतियोगिता सभी वर्ग के पशुपालकों के लिए हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालन को लाभ का धंधा बनाने और पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रतियोगिता के माध्यम से पशुपालकों को बेहतर नस्ल की गायों के पालन, दूध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही इस पहल से प्रदेश में देशी गोवंश के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्नत पशुपालन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। प्रतियोगिता में सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। विभाग द्वारा मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के अंतर्गत ‘गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ के क्रियान्वयन को स्वीकृति भी दी चुकी है। 

पशुपालकों को मिलेंगे 624 पुरस्कार, ₹3.64 करोड़ की पुरस्कार राशि वितरित होगी

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा शुरू की गई गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता के अंतर्गत कुल 624 पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। इसके माध्यम से उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग  ₹3 करोड़ 64 लाख की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी।

देशी नस्ल की दुधारू गायों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान

योजना अंतर्गत गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी, निवाड़ी सहित अन्य उन्नत अधिसूचित स्वदेशी नस्लों के संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। द्वितीय वर्ष 2027-28 से वर्ष 2030-31 तक प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। पुरस्कार की राशि का उपयोग शत-प्रतिशत देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए ही किया जा सकेगा। योजना के माध्यम से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, देशी नस्लों के संरक्षण, पशुपालकों की आय में वृद्धि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। साथ ही वृंदावन ग्रामों को दुग्ध उत्पादन और देशी गोवंश के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

विकासंखड एवं जिला स्तर पर समिति गठित
प्रतियोगिता के आयोजन के लिए विकासखंड एवं जिला स्तर पर समिति का गठन किया गया है। विकासखंड स्तरीय समिति में अनुभाग अधिकारी (राजस्व) तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति द्वारा प्रतिभागियों से आवेदन प्राप्त कर उनका संकलन एवं परीक्षण किया जाएगा तथा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता के परिणामों का संकलन एवं परीक्षण करने के बाद उन्हें जिले के उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी को भेजा जाएगा। 
वहीं, जिला स्तरीय समिति में जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी, उपसंचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग तथा उप पंजीयक, सहकारी संस्थाएं शामिल हैं। उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति द्वारा विकासखंड स्तरीय समिति से प्राप्त प्रस्तावों का निर्धारित मापदंडों के अनुसार परीक्षण एवं सत्यापन किया जाएगा। इसके उपरांत पुरस्कार विजेताओं के नाम स्वीकृत कर जारी किए जाएंगे। जिला उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी द्वारा प्रतियोगिता के परिणामों का संकलन कर संचालक, पशुपालन एवं डेयरी को भेजा जाएगा। 

योजना के उद्देश्य

- प्रत्येक "ग्राम" में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना।
-     अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करना।
- उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादक गायों की पहचान करना।
-     पशुपालकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना।
- पुरस्कार राशि के माध्यम से उन्नत देशी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहित करना।
-     गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं अन्य उन्नत अधिसूचित स्वदेशी नस्लों का संवर्धन करना।
- समस्त ग्रामों को दुग्ध उत्पादन एवं देशी पशुधन संवर्धन के आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना।
-     पशुपालकों की आय बढ़ाना एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना।
- वृंदावन ग्राम या विकासंखड स्तरीय प्रतियोगिता में एक परिवार से एक प्रतिभागी या गाय शामिल हो सकेगी।

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