पर्यावरण प्रभाव आकलन पूरा होने से पहले ही सैकड़ों हेक्टेयर जंगल साफ करने का मामला; करीब 4 लाख पेड़ काटे जाने का दावा
30 अक्टूबर 2026। फिनलैंड में अमेरिकी टेक कंपनी गूगल के प्रस्तावित डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहरा गया है। फिनिश पुलिस ने उत्तरी फिनलैंड में कंपनी की एक प्रस्तावित परियोजना के स्थल पर पर्यावरण नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर आपराधिक जांच शुरू की है। आरोप है कि अनिवार्य पर्यावरण प्रभाव आकलन पूरा होने से पहले ही बड़े पैमाने पर जंगल साफ कर दिया गया और निर्माण स्थल पर खुदाई तथा जल निकासी का काम किया गया।
पुलिस के मुताबिक, यह जांच मुहोस (Muhos) में प्रस्तावित डेटा सेंटर साइट पर पर्यावरण को संभावित नुकसान पहुंचने की शिकायतों के बाद शुरू हुई है। मामले में गूगल की स्थानीय सहायक कंपनी टुइके फिनलैंड (Tuike Finland) की गतिविधियों की जांच की जा रही है।
पांच शिकायतों के बाद जांच शुरू
उत्तरी फिनलैंड के ओउलू पुलिस विभाग ने बताया कि इस मामले में जांच के लिए पांच अनुरोध प्राप्त हुए हैं। फिनलैंड के सार्वजनिक प्रसारक YLE के अनुसार, इनमें से एक अनुरोध फिनिश सुपरवाइजरी एजेंसी (LVV) की ओर से भी भेजा गया है। यह एजेंसी पर्यावरण संबंधी परमिट और आकलन की निगरानी करती है।
जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि निर्माण स्थल पर की गई गतिविधियों से पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। अधिकारियों को साइट पर जल निकासी और जल प्रबंधन से जुड़ी संभावित समस्याएं भी मिली हैं। अब यह जांच की जा रही है कि इन गतिविधियों से आसपास के जल स्रोतों और प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है या नहीं।
हालांकि, आपराधिक जांच शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी को दोषी ठहरा दिया गया है। मामले में कानूनी उल्लंघन की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
दो परियोजनाओं के लिए सैकड़ों हेक्टेयर जंगल साफ
गूगल ने स्वीकार किया है कि उसने मुहोस में प्रस्तावित डेटा सेंटर के लिए लगभग 330 हेक्टेयर जंगल साफ किया है। इसके अलावा, काजानी (Kajaani) क्षेत्र में एक अन्य प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजना के लिए करीब 200 हेक्टेयर जंगल हटाया गया है।
इन दोनों परियोजनाओं के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। इसी वजह से जंगलों की कटाई और शुरुआती निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिनिश एसोसिएशन फॉर नेचर कंजर्वेशन से जुड़ी पर्यावरणविद् मारी अन्नाला ने ब्रिटिश समाचार पत्र द गार्जियन को बताया कि मुहोस में लगभग 2.5 लाख और ओतानमाकी (Otanmäki) में करीब 1.5 लाख पेड़ काटे गए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग चार लाख पेड़ों की कटाई का दावा किया गया है।
इतने बड़े पैमाने पर जंगल साफ किए जाने से जैव विविधता, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जल संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नियामकों ने शुरुआती काम रोकने के दिए आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए फिनिश नियामकों ने अक्टूबर में दोनों प्रस्तावित डेटा सेंटर स्थलों पर चल रहे शुरुआती काम को रोकने का आदेश दिया था। अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, खुदाई और जल निकासी से संबंधित गतिविधियों पर आपत्ति जताई थी।
गूगल ने 14 अक्टूबर को पुष्टि की कि उसने अधिकारियों के आदेश का पालन करते हुए संबंधित काम रोक दिया है।
नियामक एजेंसी LVV ने मुहोस साइट पर एक अन्य पर्यावरणीय जोखिम की ओर भी ध्यान दिलाया है। एजेंसी के मुताबिक, इस क्षेत्र में ब्लैक शेल नामक चट्टानों के भंडार मौजूद हैं। खुदाई और जल निकासी के कारण अम्लीय तथा धातुओं से दूषित पानी निकलने की आशंका है, जो आसपास के जल स्रोतों और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
एजेंसी ने कंपनी से 5 नवंबर तक विस्तृत जल प्रबंधन योजना प्रस्तुत करने की मांग की है, ताकि संभावित जोखिमों का आकलन किया जा सके और उनसे निपटने के उपाय स्पष्ट हों।
गूगल ने जताया खेद, लेकिन कानून के अनुसार काम करने का दावा
गूगल फिनलैंड के कंट्री मैनेजर एंटी जारविनन ने जंगलों की बड़े पैमाने पर कटाई को लेकर खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने फिनलैंड के कानूनों की अपनी समझ के आधार पर काम किया था।
YLE से बातचीत में जारविनन ने कहा, "मुझे इस बात का बहुत खेद है कि हम आज ऐसी स्थिति में हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया था। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जंगल साफ करने और साइट तैयार करने से संबंधित गतिविधियों के बारे में किन अधिकारियों को पहले से जानकारी दी गई थी।
अब पुलिस की जांच यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगी कि परियोजना के शुरुआती चरणों में लागू पर्यावरणीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
डेटा सेंटर परियोजनाओं पर दुनिया भर में बढ़ता विरोध
फिनलैंड का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दुनिया भर में बड़े डेटा सेंटरों के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस तेज हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बना रही हैं।
इन केंद्रों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और शीतलन के लिए पानी की आवश्यकता होती है। इनके निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने, जंगलों की कटाई और स्थानीय संसाधनों पर बढ़ते दबाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
अमेरिका में भी डेटा सेंटर परियोजनाओं का विरोध बढ़ रहा है। वर्जीनिया में प्रदर्शनकारियों ने नई परियोजनाओं को रोकने की मांग की है, जबकि एरिजोना में पानी की कमी और बिजली की बढ़ती लागत को लेकर प्रस्तावित डेटा सेंटरों पर आपत्ति जताई गई है।
फिनलैंड में गूगल की परियोजनाओं से जुड़ा विवाद इस सवाल को फिर सामने लाता है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI के विस्तार के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण पर्यावरण संरक्षण के नियमों के साथ किस तरह संतुलित किया जाए।
फिलहाल, मामले में पुलिस की जांच जारी है। इसका नतीजा यह तय करने में अहम होगा कि परियोजनाओं के लिए जंगल साफ करने और जल निकासी संबंधी गतिविधियों में पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।