31 अक्टूबर 2026। अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा की फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ विवादों में घिर गई है। वरिष्ठ स्वतंत्र खोजी पत्रकार संध्या रविशंकर ने फिल्म के निर्माताओं पर अपनी वास्तविक जिंदगी की कहानी का इस्तेमाल बिना अनुमति और श्रेय दिए करने का आरोप लगाया है। पत्रकार का दावा है कि उन्होंने वर्ष 2022 और 2023 में नेटफ्लिक्स के साथ अपनी कहानी साझा की थी, लेकिन फिल्म में उनके योगदान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
संध्या रविशंकर ने फिल्म की आलोचना करते हुए इसके अभिनय और न्यूज़रूम के चित्रण पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने निर्देशक-लेखक ध्रुव त्रिपाठी सहित फिल्म से जुड़े लोगों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप पत्रकार की ओर से लगाए गए हैं। फिल्म निर्माताओं की प्रतिक्रिया सामने आने पर ही इस मामले के दूसरे पक्ष की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नेटफ्लिक्स को टैग कर लगाया कहानी इस्तेमाल करने का आरोप
ध्रुव त्रिपाठी के निर्देशन में बनी ‘रिपोर्टिंग लाइव’ हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। फिल्म की कहानी संध्या यादव नाम की एक टीवी रिपोर्टर और उनके वीडियो जर्नलिस्ट विनोद शर्मा के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अवैध रेत खनन और निर्माण से जुड़े घोटाले का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं।
फिल्म रिलीज होने के बाद संध्या रविशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नेटफ्लिक्स को टैग करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि फिल्म में रिपोर्टर के किरदार का नाम, अवैध रेत खनन की जांच और कहानी के कुछ हिस्से उनकी वास्तविक पत्रकारिता से मिलते-जुलते हैं।
संध्या के मुताबिक, उन्होंने 2022 और फिर 2023 में नेटफ्लिक्स के सामने अपनी कहानी रखी थी। इसके बावजूद फिल्म में उन्हें कोई श्रेय नहीं दिया गया।
उन्होंने पोस्ट में लिखा कि जब किसी रिपोर्टर का नाम ‘संध्या’ रखा जाए, उसे अवैध रेत खनन का पर्दाफाश करते दिखाया जाए और उनकी वास्तविक कहानी के हिस्सों का इस्तेमाल किया जाए, तो उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
फिल्म के अभिनय और न्यूज़रूम के चित्रण पर भी उठाए सवाल
संध्या रविशंकर ने केवल कहानी के इस्तेमाल पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि फिल्म की गुणवत्ता की भी आलोचना की। उन्होंने इसे बेहद घटिया फिल्म बताते हुए अभिनय को खराब करार दिया।
उनका कहना है कि परिणीति चोपड़ा का किरदार वास्तविक पत्रकार के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके से मेल नहीं खाता। उन्होंने फिल्म में न्यूज़रूम की कार्यप्रणाली को भी अवास्तविक और बचकाना बताया।
पत्रकार ने फिल्म के निर्माताओं पर आरोप लगाया कि कहानी में बदलाव करके उसे मूल घटनाओं से अलग दिखाने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार, कम से कम सार्वजनिक रूप से माफी मांगना फिल्म निर्माताओं की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
हालांकि, किसी फिल्म की कहानी और वास्तविक घटनाओं के बीच समानता अपने आप में कॉपीराइट उल्लंघन का अंतिम प्रमाण नहीं होती। इस मामले में आरोपों की पुष्टि के लिए यह देखना जरूरी होगा कि संध्या ने नेटफ्लिक्स के साथ वास्तव में कौन-सी सामग्री साझा की थी, फिल्म की पटकथा कब तैयार हुई और दोनों के बीच कितनी विशिष्ट समानताएं हैं।
तमिलनाडु में अवैध रेत खनन पर खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित हैं संध्या
संध्या रविशंकर तमिलनाडु में अवैध बीच सैंड माइनिंग यानी समुद्र तट की रेत के कथित अवैध खनन पर अपनी खोजी रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने विशेष रूप से थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी जैसे दक्षिणी तटीय जिलों में रेत खनन से जुड़े मामलों की पड़ताल की है।
उनकी रिपोर्टिंग में प्रभावशाली खनन कारोबारियों और कंपनियों से जुड़े आरोप भी सामने आए थे। इनमें वी.वी. मिनरल और उसके मालिक एस. वैकुंठराजन से संबंधित मामले शामिल रहे हैं।
रेत खनन से जुड़े ऐसे मामलों में पर्यावरणीय नुकसान, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में संध्या ने फिल्म की कहानी और अपने पत्रकारिता अनुभव के बीच समानता का दावा किया है।
क्या है ‘रिपोर्टिंग लाइव’ की कहानी?
‘रिपोर्टिंग लाइव’ में परिणीति चोपड़ा और देवेन भोजानी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म में अमोल पालेकर, आदिल हुसैन और शेखर सुमन भी नजर आते हैं। ध्रुव त्रिपाठी ने इस फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की है। उन्होंने मिहिर जाधव के साथ मिलकर इसकी कहानी लिखी है। फिल्म का निर्माण पार्थ किरण ठाकुर और जोशुआ शिरसाथ ने किया है।
फिल्म में एक रिपोर्टर और उसका कैमरामैन एक दुखद घटना की जांच करते हुए अवैध रेत खनन की दुनिया तक पहुंचते हैं। रेत को ‘ब्राउन गोल्ड’ के रूप में दिखाया गया है, जिसके कारोबार में हितों के टकराव और हिंसा का खतरा बना रहता है। जैसे-जैसे दोनों पत्रकार सच्चाई के करीब पहुंचते हैं, उनके लिए खतरा भी बढ़ता जाता है।
अब निर्माताओं के जवाब पर टिकी नजर
संध्या रविशंकर के आरोपों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि वास्तविक घटनाओं और पत्रकारों के अनुभवों पर आधारित फिल्में बनाते समय मूल स्रोत को कितना श्रेय दिया जाना चाहिए।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि फिल्म की कहानी सीधे तौर पर संध्या रविशंकर की रिपोर्टिंग से ली गई है या नहीं। इसके लिए उनके दावों, नेटफ्लिक्स के साथ कथित संवाद और फिल्म की पटकथा से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
यदि दोनों कहानियों के बीच ठोस समानताएं सामने आती हैं, तो यह मामला रचनात्मक अधिकारों, पत्रकारिता के श्रेय और वास्तविक घटनाओं पर आधारित मनोरंजन सामग्री की जिम्मेदारी से जुड़े व्यापक सवाल उठा सकता है। अब देखना होगा कि नेटफ्लिक्स और फिल्म के निर्माता इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं।