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सेहत की अनदेखी पड़ सकती है भारी: रोजमर्रा की 7 आदतें जो दिल, दिमाग और शरीर को रख सकती हैं स्वस्थ

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Digital Desk
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📍 भोपाल
सेहत की अनदेखी पड़ सकती है भारी: रोजमर्रा की 7 आदतें जो दिल, दिमाग और शरीर को रख सकती हैं स्वस्थ

डेस्क रिपोर्ट | Prativad.com

1 नवंबर 2026। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम, परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। देर रात तक जागना, घंटों कुर्सी पर बैठे रहना, अनियमित खानपान, जरूरत से ज्यादा नमक-चीनी और शारीरिक गतिविधि की कमी धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। कई बार शरीर में गंभीर समस्या विकसित होने के बावजूद शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कई अन्य गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि रोजमर्रा की जिंदगी में कौन-से बदलाव अपनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सकता है?

1. खाने की थाली में करें छोटा लेकिन जरूरी बदलाव

स्वस्थ रहने के लिए महंगे खाद्य पदार्थ या विशेष डाइट अपनाना जरूरी नहीं है। घर में मिलने वाले सामान्य खाद्य पदार्थों से भी संतुलित भोजन तैयार किया जा सकता है।

दाल, चना, राजमा, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, दूध या दही और सीमित मात्रा में मेवे शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। भोजन में विविधता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय पोषण संस्थान की 2024 की आहार संबंधी गाइडलाइंस में संतुलित भोजन, खाद्य पदार्थों की विविधता और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने पर जोर दिया गया है।

क्या करें?

रोजाना भोजन में अलग-अलग प्रकार की सब्जियां शामिल करें।

मैदा और अत्यधिक परिष्कृत अनाज की जगह साबुत अनाज को प्राथमिकता दें।

दालों और अन्य प्रोटीन स्रोतों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाएं।

पैकेट वाले स्नैक्स, मीठे पेय और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।

2. नमक और चीनी पर रखें नजर

अधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ा सकता है। वहीं, मीठे पेय, मिठाइयों और अतिरिक्त चीनी का बार-बार सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बिगड़ने में योगदान दे सकता है।

कई लोग घर में कम नमक खाते हैं, लेकिन अचार, पापड़, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों से काफी अतिरिक्त नमक ले लेते हैं।

इसलिए केवल खाने में ऊपर से डाला जाने वाला नमक ही नहीं, बल्कि पूरे दिन में खाए गए खाद्य पदार्थों पर ध्यान देना जरूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए प्रतिदिन कुल नमक की मात्रा 5 ग्राम से कम रखने की सलाह देता है। इसमें भोजन बनाने और खाने के दौरान इस्तेमाल किया गया नमक, दोनों शामिल हैं।

3. रोजाना पैदल चलने के लिए निकालें समय

नियमित व्यायाम का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को जिम जाना ही पड़ेगा। तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैरना और अपनी क्षमता के अनुसार अन्य शारीरिक गतिविधियां भी फायदेमंद हो सकती हैं।

WHO के अनुसार, वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके अलावा, सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी उपयोगी हैं।

जो लोग लंबे समय से निष्क्रिय हैं, वे शुरुआत में 10 से 15 मिनट पैदल चल सकते हैं और धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, हृदय रोग, गंभीर जोड़ों की समस्या या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे लोगों को व्यायाम की तीव्रता तय करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

4. पर्याप्त नींद को न समझें गैरजरूरी

देर रात तक मोबाइल चलाना, लगातार स्क्रीन पर काम करना और अनियमित समय पर सोना नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

पर्याप्त नींद शरीर और मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। अधिकांश वयस्कों को नियमित रूप से लगभग 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है।

बेहतर नींद के लिए सोने और जागने का समय तय रखें, रात में कैफीन का सेवन सीमित करें और सोने से पहले मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश करें।

यदि लगातार खर्राटे आते हैं, नींद के दौरान सांस रुकने जैसा अनुभव होता है या पर्याप्त नींद के बावजूद दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

5. ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं

स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि कई बीमारियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के मौजूद रह सकती हैं।

उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल का स्तर इसका उदाहरण हैं। समय पर जांच से जोखिम की पहचान करने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

किस उम्र में कौन-सी जांच कितनी बार करानी चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, जीवनशैली और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच कराएं। यदि किसी जांच का परिणाम असामान्य आता है, तो स्वयं दवा शुरू करने या इंटरनेट पर बताए गए नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लें।

6. मानसिक स्वास्थ्य को भी दें बराबर महत्व

लगातार तनाव, काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं और सामाजिक अलगाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर नींद, भूख, काम करने की क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

रोजाना कुछ समय अपनी पसंद की गतिविधि के लिए निकालना, परिवार या मित्रों से बातचीत करना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।

तनाव कम करने के लिए ध्यान, धीमी सांस लेने के अभ्यास या प्रकृति के बीच समय बिताने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, लंबे समय तक उदासी, घबराहट या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने पर पेशेवर मदद लेना जरूरी है।

7. इंटरनेट के स्वास्थ्य संबंधी दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें

सोशल मीडिया पर वजन घटाने, डायबिटीज ठीक करने, शरीर को डिटॉक्स करने और बिना दवा बीमारियां दूर करने के कई दावे किए जाते हैं। इनमें से सभी दावे वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नहीं होते।

किसी एक खाद्य पदार्थ, घरेलू नुस्खे या सप्लीमेंट को हर बीमारी का इलाज मानना नुकसानदेह हो सकता है। विशेष रूप से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्धारित दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए।

स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ICMR और राष्ट्रीय पोषण संस्थान जैसे विश्वसनीय स्रोतों को प्राथमिकता दें।

निष्कर्ष: अच्छी सेहत की शुरुआत आज से

स्वस्थ रहने के लिए जीवन में बड़े बदलाव करने की जरूरत हमेशा नहीं होती। संतुलित भोजन, नियमित पैदल चलना, पर्याप्त नींद, नमक-चीनी पर नियंत्रण और समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि बीमारी के लक्षणों का इंतजार करने के बजाय अपनी सेहत को नियमित प्राथमिकता दी जाए। उम्र, शारीरिक स्थिति और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार जीवनशैली में बदलाव करना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में व्यावहारिक कदम है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह डॉक्टर की सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी बीमारी, दवा या विशेष आहार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।

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