तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं; जिनके लिए यह आखिरी मौका है उन्हें अपात्र होने का डर, संविदा कर्मचारियों के नियमिकरण की प्रक्रिया भी अटकी
2 नवंबर 2026। ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में विभिन्न पदों पर होने वाली भर्ती को लेकर तैयारी कर रहे आवेदकों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अधिसूचना जारी होने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू न होने से अभ्यर्थियों का भरोसा टूटता जा रहा है। उनका कहना है कि हो रही देरी सिर्फ एक भर्ती को आगे नहीं बढ़ा रही, बल्कि उनके करियर की पूरी योजना को अनिश्चितता में डाल रही है।
भर्ती किन तीन विद्युत वितरण कंपनियों में होनी है
1. मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर
2. मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल
3. मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर
सबसे तीखी चिंता उन अभ्यर्थियों के बीच है जिनके लिए यह भर्ती आखिरी अवसर है। इनमें वे युवा शामिल हैं जो पहले भी कई परीक्षाओं में बैठ चुके हैं और अब निर्धारित अधिकतम आयु सीमा के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। उन्हें यह डर सता रहा है कि कहीं भर्ती प्रक्रिया शुरू होने तक वे आयु सीमा पार कर चुके हों और इस तरह अपने आप ही अपात्र हो जाएं। अभ्यर्थियों का कहना है कि हर वर्ष उम्मीद बंधती है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, और हर वर्ष केवल इंतजार लंबा हो जाता है।
अभ्यर्थियों की मांग है कि विभाग जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और उसका पारदर्शी समय-सारिणी जारी करे, जिससे तैयारी करने वाले युवाओं को यह पता रहे कि उन्हें कब तक और किस आधार पर इंतजार करना है। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि जिन पदों पर नियुक्ति होनी है, उनकी संख्या स्पष्ट की जाए और देरी के कारण आयु सीमा के कगार पर पहुंच चुके अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए नियमों के अंतर्गत आयु सीमा में एक बार छूट पर विचार किया जाए।
यह मामला सिर्फ एक भर्ती के लंबित रहने का नहीं है। लगातार टलती भर्ती प्रक्रिया से अभ्यर्थियों में निराशा और मानसिक दबाव भी बढ़ता है, क्योंकि इस बीच उनके सामने आने वाले दूसरे अवसर भी आयु सीमा और समय की वजह से सिकुड़ते चले जाते हैं। इसी कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी को केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा जनहित का मुद्दा माना जा रहा है।
इस बीच एक और मुद्दा अभ्यर्थियों की बेचैनी बढ़ा रहा है। इन कंपनियों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमिकरण की प्रक्रिया भी अटकी हुई है। लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नियमिकरण की प्रक्रिया शुरू होने से उनकी सेवा की अनिश्चितता खत्म होगी, लेकिन प्रक्रिया शुरू न होने से वे भी इंतजार में हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सीधी भर्ती और नियमिकरण, दोनों प्रक्रियाओं के एक साथ अटकने से विभाग की पूरी भर्ती व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि भर्ती में देरी का कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया जाता, जिससे अफवाहों और आशंकाओं को बल मिलता है। उनकी मांग है कि विभाग समय-समय पर प्रक्रिया की स्थिति सार्वजनिक करे, जिससे अभ्यर्थियों को भरोसा रहे कि भर्ती रद्द नहीं हुई है और उनकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी।
सवाल यह है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक आयु सीमा के कगार पर खड़े उन अभ्यर्थियों का क्या होगा जिनके पास अब कोई दूसरा मौका नहीं बचा है, और संविदा कर्मचारियों के नियमिकरण का रास्ता कब खुलेगा।
फिलहाल अभ्यर्थियों की तैयारी जारी है और उनकी चिंता भी। वे केवल यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी और उनकी मेहनत किस दिन कसौटी पर खरी उतरेगी।