8 नवंबर 2026। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए सात न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। इन बदलावों का असर जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की मुख्य पीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ तथा विभिन्न जिला एवं परिवार न्यायालयों पर पड़ेगा।
मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल धर्मेंद्र सिंह द्वारा जारी आदेश में प्रधान रजिस्ट्रार, प्रधान जिला न्यायाधीश और परिवार न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीश सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इंदौर और रतलाम में महत्वपूर्ण बदलाव
आदेश के अनुसार, सागर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अखिलेश कुमार मिश्रा को इंदौर खंडपीठ का नया प्रधान रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। वहीं, इंदौर खंडपीठ के मौजूदा प्रधान रजिस्ट्रार अनूप कुमार त्रिपाठी का तबादला रतलाम परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के पद पर किया गया है।
सीहोर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश वैभव मंडलोई को जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की मुख्य पीठ में प्रधान रजिस्ट्रार (ILR एवं परीक्षा) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके स्थान पर अजय सिंह ठाकुर सीहोर परिवार न्यायालय के नए प्रधान न्यायाधीश होंगे।
जबलपुर और इंदौर जोन में नई जिम्मेदारियां
इंदौर जोन के प्रधान जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) राजीव कुमार अयाची को जबलपुर मुख्य पीठ में विशेष कार्याधिकारी (OSD) नियुक्त किया गया है। ग्वालियर खंडपीठ के प्रधान रजिस्ट्रार राजीव के. पाल अब उनके स्थान पर इंदौर जोन के प्रधान जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) का पद संभालेंगे।
वहीं, प्रधान रजिस्ट्रार (सतर्कता) राजेंद्र कुमार शर्मा (सीनियर) को जबलपुर जोन का प्रधान जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) नियुक्त किया गया है। इस पद पर पहले से कार्यरत अजय प्रकाश मिश्रा को अब प्रधान रजिस्ट्रार (सतर्कता) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रामजी गुप्ता को ग्वालियर खंडपीठ की जिम्मेदारी
रतलाम परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रामजी गुप्ता को ग्वालियर खंडपीठ का नया प्रधान रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ ग्वालियर खंडपीठ के प्रशासनिक कामकाज में भी बदलाव होगा।
अनूपपुर में अतिरिक्त प्रभार
अनूपपुर जिला न्यायालय में भी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। आदेश के मुताबिक, प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आशुतोष अग्रवाल प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक इस पद पर किसी नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती।
हाई कोर्ट के इन आदेशों से प्रदेश के विभिन्न न्यायिक संस्थानों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को नई नियुक्तियों के अनुसार कार्यभार संभालना होगा।