8 नवंबर 2026। मेटा पिक्सेल के जरिए 664 अस्पतालों और हेल्थकेयर वेबसाइटों से मरीजों का डेटा जुटाने का आरोप, बिना जानकारी और सहमति के निजी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां साझा किए जाने का दावा
क्या फेसबुक को पता है कि आप किस बीमारी का इलाज करा रहे हैं या डॉक्टर ने आपको कौन सी दवा लिखी है? अमेरिका में मेटा के खिलाफ दायर एक सामूहिक मुकदमे ने यूजर्स की डिजिटल प्राइवेसी और निजी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा पर आरोप है कि उसने अपने ट्रैकिंग टूल 'मेटा पिक्सेल' (Meta Pixel) के माध्यम से मरीजों की संवेदनशील स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एकत्र की। आरोप है कि यह डेटा मरीजों की जानकारी और सहमति के बिना जुटाया गया, जो उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े राज्य और संघीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।
क्या है मेटा पिक्सेल और कैसे करता है काम?
मेटा पिक्सेल एक ट्रैकिंग कोड है, जिसे वेबसाइट और ऐप में लगाया जाता है। इसका इस्तेमाल यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों को समझने, विज्ञापनों की प्रभावशीलता मापने और विज्ञापन अभियानों को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है।
लेकिन मुकदमे में दावा किया गया है कि हेल्थकेयर से जुड़ी वेबसाइटों पर इस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मरीजों की निजी जानकारी भी मेटा तक पहुंची। इसमें बीमारी, इलाज, डॉक्टरों और दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन से जुड़ी जानकारियां शामिल हो सकती हैं।
फेसबुक यूजर्स के एक समूह का आरोप है कि मेटा को सैकड़ों अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली संस्थाओं से मरीजों का डेटा मिल रहा था, जबकि संबंधित यूजर्स को इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने इसके लिए अनुमति भी नहीं दी थी।
664 अस्पतालों और हेल्थकेयर वेबसाइटों का मामला
'इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुकदमे में अंतरिम सह-प्रमुख वकील कोहेन मिलस्टीन ने बताया कि वादी पक्ष ने कम से कम 664 अस्पताल प्रणालियों और हेल्थ प्रोवाइडर वेबसाइटों की पहचान की है, जहां से मेटा को कथित तौर पर मरीजों की जानकारी प्राप्त हुई।
उत्तरी कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला न्यायाधीश विलियम ओरिक ने फेसबुक यूजर्स की उस याचिका को मंजूरी दे दी है, जिसमें अलग-अलग दावों को मिलाकर एक सामूहिक मुकदमे (Class Action Lawsuit) के रूप में आगे बढ़ाने की मांग की गई थी।
इस फैसले से प्रभावित यूजर्स को अपने समान दावों के साथ एक ही मुकदमे में शामिल होने का रास्ता मिला है। हालांकि, अदालत की ओर से अभी मेटा को इन आरोपों का दोषी घोषित नहीं किया गया है।
किस तरह की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाने का आरोप?
मुकदमे में कथित डेटा संग्रह को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:
पेशेंट स्टेटस बटन-क्लिक क्लास: ऐसे यूजर्स जिन्होंने अस्पतालों या हेल्थकेयर वेबसाइटों पर मौजूद बटन, लिंक या अन्य विकल्पों पर क्लिक किया।
पेशेंट हेल्थ इंफॉर्मेशन क्लास: ऐसे मरीजों की जानकारी, जिसमें उनकी बीमारी, इलाज और डॉक्टरों से संबंधित विवरण शामिल होने का आरोप है।
प्रिस्क्रिप्शन ड्रग इंफॉर्मेशन क्लास: ऐसे यूजर्स जिनकी डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं और प्रिस्क्रिप्शन से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर एकत्र की गई।
पेशेंट डिवाइस इंट्रूज़न क्लास: ऐसे यूजर्स जिनके डिवाइस हेल्थकेयर वेबसाइटों या ऐप्स का इस्तेमाल करते समय मेटा के ट्रैकिंग टूल्स से प्रभावित हुए।
डिजिटल प्राइवेसी पर फिर उठे गंभीर सवाल
यह मामला केवल फेसबुक या मेटा तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन हेल्थकेयर सेवाओं, डिजिटल विज्ञापन और डेटा ट्रैकिंग के बीच बढ़ते संबंधों ने यूजर्स की निजता को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं।
आज मरीज ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करते हैं, अपनी मेडिकल रिपोर्ट देखते हैं, दवाओं की जानकारी हासिल करते हैं और अस्पतालों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उनकी स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का विज्ञापन कंपनियों तक पहुंचना प्राइवेसी के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
अगर किसी व्यक्ति की बीमारी, इलाज या दवाओं से जुड़ी जानकारी उसकी अनुमति के बिना किसी विज्ञापन प्लेटफॉर्म तक पहुंचती है, तो यह उसके निजी जीवन और डेटा सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय है।
इस मुकदमे का नतीजा भविष्य में हेल्थकेयर वेबसाइटों, सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल, अदालत में लगाए गए आरोपों की कानूनी जांच और उन पर अंतिम फैसला होना बाकी है।