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भाषाओं के झगड़ो
ने तोड़ दिये है कई ताकतवर देश, हिन्दी भाषियों को बनना होगा बड़े दिल का- सुब्बाराव
सज्जनों की सक्रियता से समाज में अपराधवृत्ति पर अंकुश संभव
गांधीवादी विचारक डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ने कहा है कि सज्जनों की निष्क्रियता और
दुर्जनों की सक्रियता जैसी दो बुराईयां समाज में विद्यमान हैं, इसी वजह से
अपराधवृत्ति समाप्त नहीं हो रही है। अच्छे लोग यदि सक्रिय हो जायें तो किसी हद तक
अपराधों पर अंकुश लग सकता है। डॉ. सुब्बाराव ने यह बात आज यहां ''अपराध-विवेचना एवं
सामाजिक जागरूकता'' विषय पर अपने व्याख्यान में कही। म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार
समिति द्वारा बसंत व्याख्यानमाला के तहत ''मंथन'' कार्यक्रम में इस व्याख्यान का
आयोजन किया गया था।
14 फरवरी 2010,
हिन्दी भवन, भोपाल
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