Author : RMP Singhआर.एम.पी सिंह जनसंर्पक विभाग में उपर संचालक हैं और समाचार प्रभाग के प्रभारी हैं। उन्हें समाचार प्रभाग बड़ा सोच—समझकर दिया गया होगा, क्योंकि वे पत्रकार परिवर्तित अधिकारी हैं। पांच वर्षों तक उन्होंने जबलपुर जो संस्कारधानी हैं, में पत्रकारिता की। ढाई साल हिन्दी पत्रकारिता, ढाई साल अंग्रेजी पत्रकारिता। उसके बाद जनसंपर्क विभाग में शासकीय सेवा में आये। वे सेल्सटैक्स ऑफीसर और उप जिलाध्यक्ष में चयनित हुए थे परन्तु लेखन में रूचि रहने के कारण जनसंपर्क विभाग की सेवा में आ गये। श्री सिंह की शासकीय सेवा में आने के बाद भी लेखन में रूचि बनी रही और उन्होंने अपने भीतर बैठे पत्रकार को उदास जरूर किया, निराश नहीं होने दिया। वे लिखते रहे। पत्रकारों और लेखकों से उनके आत्मीय संबंध रहे — चाहे जहाँ भी पदस्थ रहें। नये पत्रकारों और लेखकों को सदैव प्रोत्साहित भी उन्होंने किया। जब सीधी में पदस्थ रहे — पुरातत्व पर आधारित 'वीथिका' का प्रकाशन किया। उसके बाद ग्वालियर में विभिन्न विषयों पर प्रकाशित लेखों का एक संग्रह विविधा—भाग—एक का प्रकाशन किया गया। भोपाल में उन्हें समाचार का गुरूतर दायित्व दिया गया। उस दायित्व के निर्वहन के साथ—साथ अपनी रचनाधर्मिता भी उन्होंने कायम रखी और 'जनसंपर्क विधा' पर एक पुस्तक लिखि जिसका नाम है — "पब्लिक रिलेशन — एयर विनीथ विंग्स" यह पुस्तक उनके द्वारा अंग्रेजी में लिखी गई। उसके बाद हिन्दी में इतिहास पुरूष — राजा मानसिंह तोमर प्रकाशित हुई जिसमें ऐतिहासिक व्यक्तिव राजा मान सिंह तोमर के कृतित्व के बारे में लिखा गया। यह पुस्तक अपने आप में चंबल का इतिहास है, चंबल की संस्कृति है, चंबल की पुरासंपदा है। जनसंपर्क पर लिखी पुस्तक की भूमिका पूर्व मुख्य सचिव एवं वर्तमान में मुख्यमंत्री के ऊर्जा सलाहकार श्री राकेश
साहनी ने लिखी तो राजा मानसिंह तोमर की भूमिका पूर्व जनसंपर्क मंत्री एवं वर्तमान में भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने लिखी है। दोनों व्यक्तियों ने श्री सिंह की कार्यशैली एवं व्यवहार की मुक्तकंठ से सराहना की है। उसके बाद श्री सिंह की दूसरी पुस्तक विविधा भाग—दो का प्रकाशन हुआ है जो विभिन्न विषयों पर प्रकाशित लेखों का संग्रह है। जनसंपर्क के नये आयाम श्री सिंह की 5वीं पुस्तक है जो अंग्रेजी पुस्तक एयर विनीथ विंग्स का हिन्दी अनुवाद है। अनुवादक जनसंपर्क के सहायक संचालक श्री दिनेश मालवीय हैं। श्री आर.एम.पी. सिंह की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं — राजा भोजः एक महान योद्वा और दार्श्निक शासक। यह पुस्तक हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हैं। इस पुस्तक में जहाँ राजाभोज के व्यक्तिव और कृतित्व के बारे में लिखा गया है, वहीं यह संक्षेप में मालवा का इतिहास भी है। ये दोनों पुस्तकें संदर्भ के लिए उपयोगी हैं।
यह संयोग ही है कि इस वर्ष राजाभोज के हजार वर्ष पूरे हुए हैं और मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में उत्सव मनाने का निर्णय लिया है।
श्री सिंह का प्रिय ग्रंथ है रामचरत मानस। मानस के चरित्रों का विश्लेशण भी वे पृथक—पृथक दृष्टिकोण से करते हैं।
धार्मिक पुस्तकों एवं महाकाव्यों पर चर्चा में कई विषय विशेषज्ञ भी दांतो तलें अंगुली दबा लेते हैं। उन्हें हिन्दी साहित्य, संस्कृति साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, राजनीति,
राजनीतिक विचारधाराओं, अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों का ज्ञान है और अपने आप को अद्यतन करते हैं। परिचर्चा में कभी भी कंजूसी नहीं करते। उनके हुई चर्चाओं में संपादकीय और अग्रेलेखों की विषय वस्तु मिलती है। ऐसा कोई विषय नहीं (गणित छोड़कर) जिस पर वे अपने व्यक्त नहीं करते हो। हाँ, जब सरकार के कार्यों, नौकरशाही और
राजनेताओं पर
पत्रकारों द्वारा टिप्पणी की जाती है तो वे बड़ी चतुराई से विषय परिवर्तित कर इतिहास और महाकाव्यों के चरित्र की ओर इंगित करते हैं। श्री सिंह की आठवीं पुस्तक रातचरित मानस में संवाद संप्रेषण प्रिंट में हैं जो रामचरित मानस के प्रति नये दृष्टिकोण की ओर इंगित करता है। इसमें पोराणिक पत्रकारिता को विश्लेषित किया गया है।
श्री सिंह एक अच्छे मित्र भी हैं। उनसे नियमित मिलने वालों की वे सदैव चिंता करते हैं। वे सहयोग के लिए भी तत्पर रहते हैं। उनका कहना है — पत्रकार और पत्रकारिता के साथ जनसंर्पक कर्मियों को दूध और पानी की तरह मिलना चाहिए। यदि उन्हें अलग किया जाता है तो दूध, दूध रह पाता है न पानी — पानी। अर्थात् दोनों का अस्तिव सहज नहीं रह पाता।
आज पत्रकारिता पर व्यावसायिकता हावी है। बाजारवाद के बादल की ओट में पत्रकारिता का आदित्य ओझल जरूर होता दिख रहा है, परन्तु विवेक के बयार से बादल हेंटगें और पुनः सूर्य प्रकट होगस। इस दिशा में समाज को चिंतन करना होगा। क्योंकि व्यवसाय से मुट्ठीभर लोग लाभान्वित होते हैं और पत्रकारिता से संपूर्ण मानव समाज जुड़ा है।Mr. RMP Singh is news section in-charge in Department of Public Relations, government of Madhya Pradesh. He has been entrusted with an important task of handling the news section as he is a journalist by profession with five years experience in Jabalpur – the culture capital of Madhya Pradesh. He has a long stint of two-and-a-half year in Hindi journalism and an equal span in English journalism.

Lurking deep within him, his writing skills surfaced at many times as he kept on churning out stuff for various publications, newspapers and feature agencies. He is soft, suave and soft-spoken to literary people, journalists and writers. He has always motivated burgeoning talents, journalists and writers. His inclination towards writing and literature first reflected during his initial days of his career in Sidhi district of Madhya Pradesh when he came up with his work ‘Veethika’ a book based on archaeological subjected. After a short period when he was posted in Gwalior he released first part of Vividha in form of collection of his reports appeared in various newspapers. He kept on arranging and giving shapes to his thoughts on the basis of his real experiences during his 30 long years in the department when he penned down ‘Public Relations – Air Beneath Wings’ in English.
His colleague Dinesh Malviya helped him and later a translated version also hit the bookshelves of the state libraries and sellers. His writing career is full of diversity as he has varied interest in history, religion and philosophy. Mr Singh is probably for the first writer who has ventured into collecting documents and evidences to write a book on legendary warrior Raja Mansingh. The book not only narrates the King’s ups and downs of his life but also gives a detailed information about the era. At occasions he writes on various subjects and appears in editorial or op-ed pages of different
newspapers. His collection of various reports Vividha-II will be a miss if ignored.
Singh has also authored a book titled Raja Bhoj – A Great Warrior and Philosopher Ruler. The book has come up in Hindi and English. The book narrates persona of the King and his work besides history of Malwa. Both the books will be good for references. Ram Charit Manasa is also one of his favourite subjects. He has good oratory skills and good command of the subject. His work on Ram Charit Manas will soon reach the masses. This book has been dedicated to Journalism.

