के बाहर आरा मशीने लगाई जा सकेंगी
पहले बीस किलोमीटर रेडियस का प्रावधान था
1 अप्रैल 2019। अब प्रदेश के आरक्षित या संरक्षित वन क्षेत्रों की सीमा के बाहर दस किलोमीटर रेडियस के बाद आरा मशीने लगाई जा सकेंगी। पहले बीस किलोमीटर के रेडियस के बाद आरा मशीनें लगाने का प्रावधान था।
यह नया प्रावधान राज्य के वन विभाग ने मप्र काष्ठ चिरान विनियमन अधिनियम 1984 के तहत मिले अधिकारों के तहत कर दिया है। नये प्रावधान में कहा गया है कि लोकहित में वन तथा पर्यावरण को संरक्षित और सुरक्षित करने के लिये नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के क्षेत्रों को छोडक़र, आरक्षित या संरक्षित वनों की सीमा के बाहर 10 किलोमीटर रेडियस के भीतर के क्षेत्रों को, 3 वर्ष की कालावधि हेतु, उक्त अधिनियम के प्रयोजन के लिये प्रतिषिध्द क्षेत्र के रुप में घोषित किया जाता है।
पहले यह था प्रावधान :
राज्य सरकार के वन विभाग ने इससे पहले 8 दिसम्बर,2015 को प्रावधान किया था कि नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के क्षेत्रों एवं बालाघाट जिले के किरनापुर, हिर्री, खैरलांजी, इुल्हापुर, लालबर्रा, मानपुर, अमलाझिरी तथा कोसमी के ग्रामों की सीमाओं को छोडक़र, 3 वर्ष की कालावधि हेतु आरक्षित या संरक्षित वन की सीमाओं के बाहर बीस किलोमीटर परिधि के भीतर के क्षेत्रों को उक्त अधिनियम के तहत प्रतिषिध्द क्षेत्र घोषित किया जाता है।
वनों की लकड़ी चोरी पर रोक हेतु लाया था कानून :
राज्य सरकार ने 35 साल पहले वर्ष 1984 में वनों की लकड़ी चोरी कर उनका उपयोग आरा मशीनों में करने पर रोक लगाने के लिये यह कानून लाया था। वर्ष 1984 के बाद राज्य सरकार कतिपय ग्रामों के वासियों को उनकी लकड़ी संबंधी आवश्यक्ताओं के मद्देनजर आरा मशीनें लगाने की छूट देती रही थी। किसान अपनी बैलगाड़ी में उपयोग आने वाली लकड़ी के लिये आरा मशीनों से पहिये आदि बनवाते थे। धीरे-धीरे इन ग्रामों को दी गई यह छूट खत्म की जाती रही।
रेडियस घटाकर दस किलोमीटर किया :
अब नये प्रावधान के तहत किसी भी ग्राम को कोई छूट नहीं दी गई है। सिर्फ त्रिस्तरीय नगरीय निकायों एवं साडा को यह छूट दी गई है तथा इनमें आरा मशीनें लगाई एवं संचालित की जाती रहेंगी। साथ ही आरक्षित या संरक्षित वन क्षेत्रों की सीमा से बाहर बीस किलोमीटर के रेडियस को घटाकर दस किलोमीटर रेडियस कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नये आदेश जारी किये हैं जिस पर भारत सरकार ने आरा मशीनों को लगाने एवं संचालित करने की नई गाईड लाईन बनाई है। इसी गाईड लाईन के अनुसरण में रेडियस बीस किलोमीटर से घटाकर दस किलोमीटर किया गया है। नगरीय क्षेत्रों एवं साडा को पूर्ववत छूट रहेगी परन्तु अब किसी भी ग्राम को यह छूट नहीं दी जायेगी।
- डॉ. नवीन जोशी
अब प्रदेश के वन क्षेत्रों के दस किलोमीटर रेडियस...
Place:
Bhopal 👤By: DD Views: 1551
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