×

भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने नमाज पर रोक बरकरार रखी, मुस्लिम पक्ष के लिए पास में वैकल्पिक स्थान देने का निर्देश

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 110

नई दिल्ली 14 जुलाई 2026। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में नमाज पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली विभिन्न मुस्लिम पक्षों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग भी अस्वीकार कर दी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले में केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक स्थान का निर्देश

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय होने तक मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर के निकट एक वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां वे प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम अवधि के लिए होगी।

पीठ ने मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी की दलील स्वीकार करते हुए यह भी निर्देश दिया कि एएसआई अदालत की अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं करेगा।

जुलाई के तीसरे सप्ताह में हो सकती है अंतिम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई जल्द कराई जाएगी और इसे जुलाई के तीसरे सप्ताह में सूचीबद्ध किया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने तर्क दिया कि वर्ष 2003 में एएसआई के आदेश के अनुसार शुक्रवार को नमाज और मंगलवार को पूजा की व्यवस्था थी, लेकिन अब मुस्लिम समुदाय को पूरी तरह परिसर से बाहर कर दिया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मुस्लिम पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि ऐतिहासिक अभिलेखों में यह स्थल मस्जिद के रूप में दर्ज है। उन्होंने 1927-28 के सर्वे, मध्य प्रदेश वक्फ अधिनियम की अधिसूचना तथा 1977 से चली आ रही नमाज और बसंत पंचमी पूजा की संयुक्त व्यवस्था का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की।

सरकार ने जताई प्रशासनिक चिंता

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि आदेश लागू हुए दो महीने बीत चुके हैं और प्रशासनिक स्तर पर नई व्यवस्था बन चुकी है। ऐसे में फिर से परिसर में नमाज की अनुमति देने से कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।

सीजेआई बोले, मामला बेहद संवेदनशील

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और अदालत को अत्यधिक सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाना चाहिए जिसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़े।

सीजेआई ने कहा कि दोनों पक्षों को धैर्य रखना चाहिए और मामले के अंतिम निस्तारण तक संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि अगले दो से तीन सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत सुनवाई की जाएगी।

क्या है मामला?

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई 2026 को धार स्थित भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए विभिन्न मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।

Related News

Global News