केंद्र और राज्य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण केंद्र और राज्यों के बीच क्रेडिट और बजट की लड़ाई का खामियाज़ा ग़रीब जनता तो उठाना पड़ता है.
13 जून 2019। मध्य प्रदेश में सरकार बदलते ही केंद्र की योजनाओं की रफ्तार पर ब्रेक लगता दिख रहा है. बजट के विवाद में कई योजनाएं या तो रुकी हुई हैं या रुकने के कगार पर हैं. इन्हीं में से एक प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. योजना में केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी का क्रेडिट और बजट विवाद की वजह बनता दिख रहा है.
सूबे में सरकार बदलते ही बीजेपी सरकार की योजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे थे. नई सरकार से संकेत भी मिले कि पहले की योजनाएं या तो बंद होंगी या उनके नाम बदले जाएंगे लेकिन अब केंद्र की योजनाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई है. आलम ये है कि गरीबों की छत पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं में क्रेडिट की लड़ाई और बजट की ज़रूरत के बीच एमपी में ये योजना लड़खड़ाती दिख रही है.
-प्रधानमंत्री आवास योजना में 2018-19 के दौरान 5 लाख 61 हज़ार घर बनाने का लक्ष्य था
-इस लक्ष्य के विपरीत मध्य प्रदेश में योजना के तहत 5 लाख 19 हज़ार घर बने
-2019-20 में योजना के तहत 8 लाख 32 हज़ार घर बनाने का लक्ष्य है
लेकिन फंड केवल 3 लाख 80 हज़ार घरों के लिए ही बचा है.
क्रेडिट की लड़ाई- ऐसे में बिना फंड के योजना अपने लक्ष्य तक पहुंचेगी इस पर सवाल हैं.उधर प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रेडिट सीधे तौर पर केंद्र सरकार को जाता है.लिहाजा मध्य प्रदेश सरकार गरीबों को घर देने के लिए नई योजना पर काम कर रही है ताकि क्रेडिट उसे मिले.
केंद्र और राज्य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण केंद्र और राज्यों के बीच क्रेडिट और बजट की लड़ाई कोई नयी बात नहीं है.लेकिन इसका खामियाज़ा ग़रीब जनता तो उठाना पड़ता है.
अब केंद्र की योजनाओं पर भी ब्रेक लगाएगी कमलनाथ सरकार?
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