कविताएँ

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रचना करो कि अब काँटों में फूल खिलें

रचना करो कि अब काँटों में फूल खिलें हे कवि! कलम को तलवार अब बनाओ तुम बीत गया समय अब विनम्र निवेदन का अग...

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