5 अक्टूबर 2023। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कुल 2899 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। इनमें से 230 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जबकि 279 उम्मीदवारों ने अपनी जमानत बचा पाई। शेष 2390 उम्मीदवारों की जमानत राशि निर्वाचन आयोग ने जब्त कर ली।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, जमानत राशि जब्त होने का प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किया गया है। किसी प्रत्याशी को उसकी सीट पर हुए कुल मतदान (वैध मतों की संख्या) के छठे हिस्से यानी 16 फीसदी से कम वोट मिलते हैं, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है।
निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुल 2899 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। इनमें से जीतने वाले 230 विधायकों के अलावा सिर्फ 279 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके थे, जबकि 2390 उम्मीदवारों की 2.39 करोड़ रुपये की जमानत राशि निर्वाचन आयोग ने जब्त कर ली थी। इस हिसाब से देखा जाए तो 9.6 फीसदी उम्मीदवार ही अपनी जमानत बचा सके थे। वहीं साल 2013 के चुनाव में 2.8 करोड़ रुपये की जमानत राशि जब्त हुई थी।
2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जमानत राशि जब्त होने का दर 9.6% रहा। यह दर 2013 के चुनाव की तुलना में थोड़ा कम है। 2013 के चुनाव में जमानत राशि जब्त होने का दर 12.4% रहा था।
जमानत राशि लेने का मकसद यह है कि गंभीर प्रत्याशी ही चुनाव में उतरें। हालांकि, कई प्रत्याशी सिर्फ नाम के लिए पर्चा भर देते हैं या जातिगत तौर पर चुनावों को प्रभावित करने के मकसद से पार्टियां डमी प्रत्याशी खड़े कर देती हैं।
जमानत राशि वापसी के प्रावधान
उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाए या उम्मीदवार खुद अपना नामांकन वापस ले ले तो भी जमानत राशि वापस मिल जाती है।
मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवार की मौत हो जाए, चुनाव में जीत हासिल करने और पराजित होने के बावजूद कुल मतदान का 16 फीसदी से अधिक वोट प्राप्त करने पर भी जमानत राशि लौटा दी जाती है।

पिछलें विधानसभा चुनाव में 2.39 करोड़ रुपये की जमानत राशि जब्त हुई थी
Place:
भोपाल 👤By: prativad Views: 916
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