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MP की तीन शख्सियतों को पद्मश्री, नागर, रैकवार और पंत होंगे राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 168

25 जनवरी 2026। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों में मध्य प्रदेश के लिए गौरव का पल है। राज्य की तीन प्रतिष्ठित विभूतियों मोहन नागर, भगवानदास रैकवार और कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री सम्मान दिया जा रहा है। इनका चयन पर्यावरण संरक्षण, कला और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय और दीर्घकालिक योगदान के लिए किया गया है।

भारत सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कार 2026 की सूची में इस वर्ष 45 नाम शामिल हैं, जिनमें कई को ‘अनसंग हीरोज’ के रूप में पहचाना गया है। मध्य प्रदेश से चुने गए ये तीनों नाम जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों और समाज पर पड़े ठोस असर के कारण अलग पहचान बनाते हैं।

बैतूल के मोहन नागर: पर्यावरण आंदोलन की मजबूत आवाज
पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा से प्रदेश में खास उत्साह है। जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान दशकों से जारी है। उन्होंने केवल समस्याएं नहीं गिनाईं, बल्कि समाधान जमीन पर उतारे।

23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर, स्व. भवरलाल नागर और स्व. गुलाबदेवी नागर के सुपुत्र हैं। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे बैतूल स्थित भारत भारती आवासीय विद्यालय परिसर में निवासरत हैं।

सोना घाटी से शुरू हुआ जल संरक्षण का मॉडल
बैतूल जिले की सोना घाटी में वर्षाजल संचयन और जल संरचनाओं के निर्माण के जरिए मोहन नागर ने प्राकृतिक जल चक्र को पुनर्जीवित करने का काम किया। सूखते जल स्रोतों और गिरते भू-जल स्तर से जूझ रहे इलाकों में उनके प्रयासों से न सिर्फ पानी की उपलब्धता बढ़ी, बल्कि खेती और ग्रामीण आजीविका को भी सहारा मिला।

उनके द्वारा शुरू किया गया ‘गंगा अवतरण अभियान’ धीरे-धीरे एक जनआंदोलन बना। इस अभियान के तहत तालाबों और नालों का पुनर्जीवन, वर्षाजल संग्रहण, पारंपरिक और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग और लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि स्थानीय लोग खुद जल संरक्षण की जिम्मेदारी लेने लगे।

पर्यावरण से आगे समाज तक
मोहन नागर का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल जंगल और नदियों तक सीमित नहीं है। इसी सोच के साथ उन्होंने जैविक खेती, गो-संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में भी सक्रिय काम किया। किसानों, युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों को जोड़कर उन्होंने पर्यावरण को आजीविका और सामाजिक संतुलन से जोड़ा।

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
उनके कार्यों को पहले भी राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सराहना मिली है। 2019 में राष्ट्रीय ‘जल प्रहरी’ सम्मान, 2020 में जल शक्ति मंत्रालय का ‘वाटर हीरो’ सम्मान, मध्य प्रदेश सरकार का ‘गोपाल पुरस्कार’, भाऊराव देवरस राष्ट्रीय पुरस्कार और काव्य कृति ‘चातुर्मास’ के लिए दुष्यंत कुमार साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके नाम हैं।

नीति और समाज के बीच सेतु
वर्तमान में मोहन नागर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा वे नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रबंधन मंडल और मध्यप्रदेश शासन के वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य भी हैं। इन भूमिकाओं के जरिए वे नीति निर्माण और जमीनी समाज के बीच पुल बनाने का काम कर रहे हैं।

पद्मश्री सम्मान के साथ मध्य प्रदेश की ये तीनों विभूतियां यह संदेश देती हैं कि सच्चा और टिकाऊ बदलाव बड़े मंच से नहीं, लगातार जमीनी काम से आता है।

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