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कुनो नेशनल पार्क में फिर खुशखबरी: चीता ज्वाला ने दिए 5 शावकों को जन्म, भारत में कुल संख्या 53 हुई

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 172

9 मार्च 2026। मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क से एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इससे सिर्फ दस दिन पहले ही एक अन्य चीता गामिनी ने भी शावकों को जन्म दिया था।

नए शावकों के जन्म के साथ भारत में अब तक जन्मे चीता शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जबकि देश में चीतों की कुल आबादी 53 तक पहुंच गई है। इसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

ज्वाला इससे पहले भी तीन बार मां बन चुकी है। सोमवार को जन्मे इन पांच शावकों के साथ कुनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण कार्यक्रम को नई मजबूती मिली है।

भूपेंद्र यादव ने जताई खुशी
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक पल है।

उन्होंने लिखा कि चीतों की संख्या 53 तक पहुंचना वन्यजीव डॉक्टरों, फील्ड स्टाफ और संरक्षण टीमों की लगातार मेहनत और समर्पण का नतीजा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्वाला और उसके शावक स्वस्थ रहें और भारत की चीता संरक्षण यात्रा को आगे बढ़ाएं।

CM मोहन यादव ने भी दी बधाई
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कुनो से आई इस खबर पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ज्वाला द्वारा पांच शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए एक अहम मील का पत्थर है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में चीतों की संख्या का 50 के पार पहुंचना इस बात का मजबूत संकेत है कि भारत में चीतों को दोबारा बसाने की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

संरक्षण टीम के लिए बड़ा संकेत
कुनो नेशनल पार्क में काम कर रहे वन अधिकारी और संरक्षण विशेषज्ञ इसे चीता पुनर्वास कार्यक्रम की सफलता का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार हो रहे जन्म इस परियोजना की स्थिरता और भविष्य के लिए उम्मीद बढ़ाते हैं।

दरअसल, प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाकर बसाया गया था, ताकि देश में लगभग सात दशक पहले खत्म हो चुके इस प्रजाति को फिर से बसाया जा सके।

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