14 जनवरी 2020। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों/सिविल सर्जनों से यौन हिंसा से पीडि़त लोगों की चिकित्सकीय परीक्षण का प्रमाण-पत्र 15 जनवरी तक मांगा है।
यह प्रमाण-पत्र इसलिये मांगा गया है ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव एवं डीजीपी को इस संबंध में स्टेट्स रिपोर्ट देना है।
ऐसा होगा प्रमाण-पत्र :
राज्य शासन ने सभी सीएमओ एवं सिविल सर्जनों को प्रमाण-पत्र का प्रारुप भी भेजा है। इस प्रमाण-पत्र में कहा गया है कि "प्रमाणित किया जाता है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी/सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के अधीनस्थ कार्यरत समस्त कर्मचारियों, चिकित्सा अधिकारियों एवं चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाईडलाईन्स एण्ड प्रोटोकॉल्स-मेडिको-लीगल एक्जीमिनेशन आफ सर्वाईवल/विक्टिम आफ सेक्सुअल असाल्ट" का शतप्रतिशत अनुपालन किया जा रहा है एवं उपरोक्त दिशा-निर्देशों के साथ संलग्न प्रपत्र पर्याप्त संख्या में संबंधित चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सा विशेषज्ञों के पास उपलब्ध हैं। प्रमाण-पत्र के अंत में सीएमओ/सिविल सर्जन के हस्ताक्षर होना जरुरी होगा।
सजा का है प्रावधान :
दरअसल भारत सरकार की उक्त गाईडलाईन का पालन ऐसे प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सा विशेषज्ञ को करना अनिवार्य है जो यौन हिंसा से पीडि़त मरीजों के परीक्षण से संबंधित कार्य संपादित करते हैं। इन दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166-बी के अंतर्गत कार्यवाही, जुर्माने एवं सजा का प्रावधान है।
- डॉ. नवीन जोशी
सभी सीएमओ से मांगे यौन हिंसा से पीड़ित लोगों के परीक्षण का सर्टिफिकेट
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Bhopal 👤By: DD Views: 1447
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