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भोजशाला में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज के लिए पृथक व्यवस्था, कलेक्टर ने बताया कितनी तगड़ी है सुरक्षा व्यवस्था

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 148

धार जिले में छावनी बना भोजशाला परिसर
जिला प्रशासन ने बुलाई दोनों पक्षों की बैठक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कराया अवगत

धार 22 जनवरी 2026। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला की सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी कर दी गई है। दरअसल, 23 जनवरी को बसंत पंचमी का त्योहार और जुमे की नमाज एक साथ हो रही हैं। इसी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पूरे भोजशाला परिसर को छावनी बना दिया है। इस मामले को लेकर कोई अप्रिय स्थिति न बने, इसलिए परिसर में पुलिस फोर्स के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी का कहना है कि प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा। इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने 22 जनवरी को दोनों पक्षों के साथ बैठक कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया। जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों के लिए परिसर में पृथक व्यवस्था की है।



कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पूरे शहर में चाक-चौबंद है। हर जगह पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात है। जैसा मैंने पहले भी कहा कि हमारा प्राथमिक उद्देश्य है कि कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़नी नहीं चाहिए। माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी दोनों समुदायों से सहिष्णुता, सामंजस्य और आपसी भाईचारे के साथ प्रशासन का और राज्य शासन का सहयोग करने की अपील की है। इसका सीधा अर्थ यह है कि हम जो भी निर्णय लें, उसको वो स्वीकार करें। तभी सामंजस्य और सहिष्णुता बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय आया उसके तारतम्य में आज जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों को बुलाया। उनको कोर्ट की भावना और निर्णय से अवगत कराया।

यह है कोर्ट के आदेश की मूल भावना
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने कहा कि हिंदू समुदाय को भी माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बारे में बताया। कोर्ट के आदेश में भी उनके लिए वह स्थान नियत है, जहां वो पूर्व प्रथा के अनुसार पूजा करते थे। कोर्ट के आदेश से यह भी स्पष्ट है कि दोनों समुदाय की पूजा का समय, चाहे वह 1-3 बजे होने वाली नमाज है, चाहे बसंत पंचमी का कार्यक्रम हो, उसे निर्विघ्न और पृथक रखना है। मुस्लिम समुदाए को पृथक जगह देनी है। उसका प्रवेश और निर्गम पृथक होना चाहिए। यही इस आदेश की मूल भावना है। कोर्ट के आदेश के अनुसार समुदायों को उन विकल्पों से अवगत कराया है कि वे परिसर में सुरक्षित स्मारकों के हिस्सों को छोड़कर, कहां से प्रवेश और निर्गम कर सकते हैं। सहमति और असहमति से ज्यादा बड़ा विषय कानून व्यवस्था को सुनिश्चित करना।

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