5 मार्च 2026। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध ने यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। Terje Aasland का कहना है कि क्षेत्र में सप्लाई बाधित होने से यूरोपीय देशों में रूस से गैस आयात दोबारा शुरू करने पर बहस तेज हो सकती है।
नॉर्वे के ऊर्जा मंत्री आसलैंड ने ओस्लो में पत्रकारों से कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ सकता है। उनका कहना था कि नॉर्वे पहले ही यूरोप को पाइपलाइन गैस पूरी क्षमता से सप्लाई कर रहा है और उत्पादन बढ़ाने की फिलहाल कोई अतिरिक्त गुंजाइश नहीं है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यूरोप में गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है। ट्रेडिंग डेटा के मुताबिक इस सप्ताह यूरोपीय गैस की कीमतें करीब 75% बढ़कर तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। यह उछाल मुख्य रूप से ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के सैन्य अभियान तथा तेहरान की जवाबी कार्रवाई के कारण आया है।
संघर्ष का असर ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा है। हमलों के कारण लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) ले जाने वाले कई टैंकरों की आवाजाही Strait of Hormuz से लगभग रुक गई है। इसके अलावा दुनिया के दूसरे सबसे बड़े LNG निर्यातक Qatar को भी सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से उत्पादन रोकना पड़ा।
यूरोपीय संघ की कुल गैस आपूर्ति का लगभग 5% से 15% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है, जिसमें कतर अहम भूमिका निभाता है। फिलहाल LNG सप्लाई में United States की हिस्सेदारी करीब 60% है।
हाल ही में European Union ने 2027 के अंत तक रूस से सभी गैस आयात बंद करने की योजना पर सहमति जताई थी। यह फैसला ट्रेड और ऊर्जा कानूनों के जरिए लागू करने की रणनीति के साथ तैयार किया गया था, ताकि सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति की आवश्यकता न पड़े।
लेकिन रूस से ऊर्जा आयात कम करने के बाद से यूरोप को बार-बार बढ़ती ऊर्जा लागत का सामना करना पड़ रहा है। Hungary और Slovakia जैसे कुछ देशों ने इस फैसले का विरोध किया है और इसे अदालत में चुनौती देने की चेतावनी भी दी है।
वॉल स्ट्रीट फर्म Goldman Sachs का अनुमान है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही एक महीने के लिए भी रुकती है तो यूरोप में गैस की कीमतें मौजूदा स्तर से 130% तक बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर घरों और उद्योगों की ऊर्जा लागत पर पड़ेगा।
इसी बीच Donald Trump ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान कई हफ्तों तक जारी रह सकते हैं। ऐसे में ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।














