9 जून 2026। मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की इकलौती उम्मीद, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन अब एक बड़े कानूनी विवाद में फंस गया है। नटराजन ने अपने नामांकन फॉर्म में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी कथित तौर पर छिपाई है। प्राप्त अदालती दस्तावेजों ने इस पूरे घटनाक्रम की जो टाइमलाइन उजागर की है, उसने कांग्रेस खेमे में भूकंप ला दिया है।
मामले का पूरा घटनाक्रम: कब क्या हुआ?
11 मई 2025 (अपराध की तारीख): शिकायतकर्ता ए. श्रीलता की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया।
20 अगस्त 2025 (शिकायत दर्ज): ए. श्रीलता ने हैदराबाद की 'फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट' की अदालत में मीनाक्षी नटराजन (अभियुक्त नंबर 4) और अन्य के खिलाफ मुख्य याचिका (Complaint No. of 2025) दायर की। इसमें नटराजन पर BNS Act की धारा 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
17 सितम्बर 2025 (न्यायिक समन जारी): माननीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मीनाक्षी नटराजन को 'नोटिस टू रेस्पोंडेंट' जारी किया। इस समन में उन्हें निजी तौर पर अदालत में पेश होने और अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया गया था।
24 अक्टूबर 2025 (नटराजन का जवाब): मीनाक्षी नटराजन की ओर से उनके वकील ने अदालत में एक जवाबी हलफनामा (Counter) पेश किया। इस जवाब में उन्होंने खुद को बेकसूर बताते हुए पूरी शिकायत को "राजनीतिक विद्वेष" से प्रेरित बताया और इसे खारिज करने की मांग की।
17 नवम्बर 2025 (सुनवाई की तारीख): अदालत ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जो आज भी जारी है।
नामांकन पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?
मध्यप्रदेश में कांग्रेस इस इकलौती सीट को हर हाल में जीतना चाहती है, लेकिन निर्वाचन कानून के मुताबिक उम्मीदवार को अपने खिलाफ लंबित हर आपराधिक मामले की जानकारी नामांकन हलफनामे में देनी होती है। चूँकि यह मामला 2025 से चल रहा है और नटराजन इसमें 'अभियुक्त' के तौर पर अदालत में जवाब भी दे चुकी हैं, इसलिए इसे 'अनजाने में हुई चूक' नहीं कहा जा सकता।
यदि निर्वाचन अधिकारी ने इस जानकारी को छिपाने का दोषी पाया, तो मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी आधार पर रद्द होना निश्चित है। अगर ऐसा होता है, तो कांग्रेस के पास मध्यप्रदेश में राज्यसभा की रेस से बाहर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अब सारा दारोमदार नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) पर टिका है।















