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नमो' और 'मोहन' की संकल्प शक्ति का कमाल, गौ-वंश संरक्षण से लेकर दुग्ध क्रान्ति में एमपी का धमाल

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 133

12 जून 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को 12 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। देश की आर्थिक-सामाजिक-कूटनीतिक दृष्टि से यह 12 वर्ष सफलतम वर्ष रहे हैं। इन वर्षों में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास को और अधिक गति प्रदान की, तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश को भी प्रगति के पथ पर आगे ले गए। मध्यप्रदेश को उनका भरपूर आशीर्वाद मिला। इस आशीर्वाद का परिणाम यह रहा कि आज मध्यप्रदेश दूथ की कैपिटल बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। वह दिन दूर नहीं, जब दूध और दही के मामले में प्रदेश अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के बीच देश का ह्रदयप्रदेश कहा जाने वाला मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध वन संपदा, राष्ट्रीय उद्यानों और विशाल पशुधन के कारण भारत में पशु कल्याण और संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। केन्द्र की मोदी सरकार की दूरदर्शी योजनाओं और डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के सक्रिय और समन्वित प्रयासों ने मध्यप्रदेश में पशुधन विकास, गौ-संरक्षण तथा वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा दी है। इन प्रयासों से न केवल पशुओं के स्वास्थ्य और संरक्षण में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। केन्द्र की मोदी सरकार और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संयुक्त प्रयासों से एमपी में पशुपालन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रदेश की मोहन सरकार ने पशुओं की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन को न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक विकास और किसानों की आय वृद्धि के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया है।

केन्द्र सरकार की पहल से ग्रामीण अर्थव्यस्था को मिलेगी बूस्टर डोज
केन्द्र सरकार ने पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है, जिनका मध्यप्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत प्रदेश में देशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे मध्यप्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाले दुधारू पशुओं का तेजी से विकास हो रहा है। इसी तरह से राष्ट्रीय पशुधन मिशन पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सुविधाओं और बीमा के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण के अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से टीकाकरण, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और महामारी नियंत्रण पर फोकस किया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम और पशुधन सांख्यिकी सर्वेक्षण से पशुपालकों को सब्सिडी, ऋण और तकनीकी सहायता मिल रही है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है। सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केंद्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला राजधानी भोपाल में स्थापित की जा रही है जिसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 12 करोड़ 40 लाख रु का अनुदान दिया गया है। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

गौशालाएं बन रही आत्मनिर्भर,स्वावलंबी गौशाला मिशन को मिल रही मजबूती
एमपी की मोहन सरकार ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए न केवल अपने बजट में अनुदान बढ़ाया है बल्कि पशुओं की नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया है। प्रदेश में “स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025” लागू की है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं जिसके लिए न्यूनतम 130 एकड़ सरकारी जमीन लीज पर उपलब्ध करा रही है। मध्यप्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट भी गौशाला में स्थापित किया गया है, जो गोबर से ऊर्जा उत्पादन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सरकार ने शासकीय गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाई है। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के तहत गौशालाओं को मजबूत किया जा रहा है। भटकते गोवंश के प्रबंधन के लिए 'कामधेनु निवास' जैसी पहल भी प्रदेश में शुरू की गई है, जिसमें गौशालाओं को भूमि, चारा और आय के स्रोत (दूध, गोबर) उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना ने लौटाई पशुपालकों के चेहरे की मुस्कान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आधुनिक सांचे में ढालने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना की सौगात मध्यप्रदेश की जनता को दी है। यह मध्यप्रदेश के छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत पशुपालकों को 25 दुधारू पशुओं (गाय/भैंस) की इकाई पर 36 लाख से 42 लाख रु तक ऋण और 25 से 33 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। बैगा, सहरिया जैसी पिछड़ी जनजातियों के लिए मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना के अंतर्गत 90 फीसदी अनुदान पर दो-दो पशु उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

अब एमपी बनेगा देश की ‘मिल्क कैपिटल’,आत्मनिर्भर बनेंगे पशुपालक
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का स्पष्ट संकल्प है कि मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाया जाए। इसके लिए दुग्ध समृद्धि अभियान और कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत पशुपालन को विशेष महत्व देने की विशेष पहल शुरू हुई है। 2026 के बजट में किसानों को दुधारू पशु उपलब्ध कराने, नस्ल सुधार, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम जैसी योजनाओं से पशुपालक आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है। पशुपालन क्षेत्र में 'गोरस' ऐप की डिजिटल क्रांति भी प्रदेश में अपनी दस्तक दे चुकी है। यह ऐप पशुओं केसटीक डाइट चार्ट, आहार सुधार करने पर मिलने वाले अतिरिक्त लाभ और निःशुल्क वैज्ञानिक परामर्श देने का कार्य कर रहा है। चलित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों द्वारा अब तक 15 .16 लाख पशुपालकों के घर पहुंचकर सेवाएं दी गई हैं। सभी पशुपालकों को इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

'पशुधन' और 'गौ-कल्याण' ग्रामीण विकास का बना आधार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन को ग्रामीण विकास का मुख्य आधार बनाया है। सरकार का लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बने। आज प्रदेश भर में हजारों गौशालाएं और गो-सेवा केंद्र संचालित किये जा रहे हैं। पशु स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में सरकार ने ग्वालियर में पशु वेलनेस सेंटर स्थापित किए हैं वहीँ मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां बढ़ाई गई हैं। पशुधन उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार का जोर एक तरफ जागरूकता अभियान का केंद्रित है वहीँ सहकारिता विकास पर भी वह जोर दे रही है। सरकार वर्तमान में देश के दुग्ध उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान बढ़ाने और 20% तक पहुंचाने की दिशा में प्रयत्नशील दिखाई देती है।

एमपी में डेयरी क्रांति : 2026 के बजट में मोहन ने खोला बड़ा पिटारा
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2026 में पेश किये गए बजट में गहन पशु विकास परियोजना के तहत 838 करोड़ रु का प्रावधान किया है जो दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार की माजोट इच्छाशक्ति को दिखाता है। एक तरह मोहन सरकार ने पशु कल्याण सेवाओं में विस्तार के लिए 79 करोड़ स्वीकृत किये हैं वहीँ पशुपालकों को 2 लाख तक बिना गारंटी लोन देने का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार और मोहन सरकार के समन्वित प्रयासों से मध्य प्रदेश पशु कल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह प्रयास न केवल पशुपालकों के लिए बल्कि किसानों, पर्यावरण और समग्र विकास और रोजगार के साथ आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इन प्रयासों से जहां पशुपालक आत्मनिर्भर बन रहे हैं वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। केन्द्र सरकार की योजनाओं का राज्य स्तर पर तेजी से क्रियान्वयन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकता ने मध्यप्रदेश में पशु कल्याण को एक सार्थक रूप प्रदान किया है।

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