'सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास-सबका प्रयास,' का मंत्र देने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभालते ही अन्नदाता के कल्याण का स्वप्न देखा था। इस स्वप्न के साथ विकास के अन्य कार्य करते-करते उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित कीं। आज उन्होंने अपने कार्यकाल के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इसके मद्देनजर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि उनके कार्यकाल में किसानों का भला हुआ है। इन 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार खुद को ग्लोबल लीडर भी सिद्ध किया है। कई मौकों पर विश्व के बड़े राष्ट्रों के अध्यक्षों को प्रधानमंत्री मोदी से मशवरा करते देखा गया है।
विशेष बात यह है कि इस व्यस्तता के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश को प्राथमिकता की सूची में सदैव रखा। उन्हें जब भी मौका मिला, वे मध्यप्रदेश आए और जनता का भला कर गए। वे जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। कृषि प्रधान राज्य मध्यप्रदेश के लाखों किसान अपनी मेहनत से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनकी समृद्धि और कल्याण के बिना देश की प्रगति अधूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राज्य सरकार ने किसानों के उत्थान के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। इन प्रयासों में बीमा, सिंचाई, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक, बाजार सुविधाओं और किसानों की आय दुगनी करने पर पर विशेष जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मोहन यादव सरकार के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।
किसान सम्मान निधि से अन्नदाता हुआ खुशहाल
केन्द्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि है। इसके तहत सभी भूमि धारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रू की आय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। मध्यप्रदेश में लाखों किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों को 6000 रुपये महीने देती है। इससे किसानों को जीवन संचालित करने में आसानी होती है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत भी 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में 20,878 करोड़ रु से अधिक की राशि का अंतरण किया जा चुका है।
गेहूं उपार्जन में रिकॉर्ड उपलब्धि
वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। मोहन यादव सरकार ने गेहूँ खरीदी के लक्ष्य को 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। समर्थन मूल्य पर निर्बाध खरीदी, स्लॉट अवधि बढ़ाने और सप्ताह में छह दिन उपार्जन सुनिश्चित करने जैसे कदमों से मध्य प्रदेश गेहूँ उत्पादन और खरीदी में देश में अग्रणी बना। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिला और फसल बिक्री में पारदर्शिता बढ़ी।
फसलों पर बोनस, भूमि अधिग्रहण पर ऐतिहासिक फैसला
किसान कल्याण वर्ष के तहत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के अधिग्रहण पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यह निर्णय विकास कार्यों और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। उड़द पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रु प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। सरसों के लिए भावांतर योजना का विस्तार हुआ है। आपदा प्रभावित किसानों को राहत पैकेज के भी सरकार द्वारा वितरित किए गए हैं।
मोहन का मिशन किसान कल्याण
2026 को कृषि कल्याण वर्ष घोषित कर राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने और आधुनिक कृषि की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के उत्थान को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। डबल इंजन सरकार प्रयासों से वर्ष 2026 मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित हो रहा है, जहां अनेक योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं।
‘मोहन’ ने किसानों का मन मोहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान-केंद्रित नीतियां व्यावहारिक और दूरदर्शी हैं। भावांतर योजना का विस्तार कर सोयाबीन के बाद सरसों को शामिल किया गया जबकि उड़द और मूंगफली पर समर्थन मूल्य के साथ बोनस की घोषणा हुई। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर सब्सिडी से किसानों को मूल्य संवर्धन का अवसर मिलेगा। खेती का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर बढ़ाने, तीन नदी जोड़ो परियोजना से 16 लाख हेक्टेयर सिंचाई, माइक्रो इरीगेशन विस्तार, आधुनिक मंडियां, बीज परीक्षण लैब और फसल नुकसान सर्वे के लिए तहसील-स्तरीय मौसम केंद्र जैसी रोडमैप ने किसानों का मन मोह लिया है। इसके अलावा नि: शुल्क मृदा परीक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद की उपलब्धता, 24 घंटे बिजली, शून्य ब्याज दर पर फसल ऋण, भावांतर योजना जैसे कार्यक्रमों को समर्थन दे रही है, जिसमें बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच के अंतर की भरपाई की जाती है जिससे किसान परिवारों तक सीधा लाभ पहुँच रहा है।
किसानों के प्रति संवेदनशील ‘मोहन’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं। किसानों के हितों में लिए जा रहे अनेक निर्णय न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि प्रदेश सरकार की किसान कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन से मध्यप्रदेश में कृषि विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार योजनाओं की पहुँच परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ट्रैक्टर रैली, कृषि प्रदर्शनियों और किसान सम्मेलनों के माध्यम से मोहन सरकार किसानों से सीधा संवाद कर रही है। कैबिनेट ने किसान कल्याण से जुड़ी हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है।
निर्भरता से आत्मनिर्भरता की यात्रा
कृषक मित्र योजना के तहत 90% सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप वितरित किए गए हैं जिससे किसान बिजली पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और तीसरी फसल को प्रोत्साहन देकर कृषि आय विविधीकरण और जैविक खेती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का इकलौता राज्य है जहां किसानों को 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार की किसान केंद्रित नीतियों एक प्रभाव से प्रदेश में दूध संग्रहण भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश की कृषि वृद्धि दर 16% तक पहुंचने में इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान है।
देश के विकास में देंगे योगदान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि किसानों की आमदनी बढ़ाए बिना प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। प्रत्यक्ष लाभ, उचित मूल्य, आधुनिक सिंचाई, विविधीकरण और आपदा राहत के माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकार अन्नदाताओं के हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़ी है। ये उपलब्धियां न केवल किसानों को सशक्त बना रही हैं, बल्कि मध्यप्रदेश को कृषि प्रधान राज्य के रूप में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दृष्टिकोण न केवल मध्यप्रदेश को कृषि प्रधान राज्य के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर देश के विकास में अपना योगदान देगा।















