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वैदिक मंत्रों और जयकारों से गूंजी भोजशाला, गर्भगृह में स्थापित हुई अखंड ज्योति

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📍 भोपाल
वैदिक मंत्रों और जयकारों से गूंजी भोजशाला, गर्भगृह में स्थापित हुई अखंड ज्योति
17 मई 2026। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में हिंदू समाज के लिए द्वार पूरी तरह खुलने के बाद रविवार को भव्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और सनातन संस्कृति के जयकारों के बीच गंगाजल और गोमूत्र से शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और यज्ञ का आयोजन हुआ।

भोजशाला परिसर के शुद्धिकरण के बाद ब्राह्मणों ने वैदिक रीति-रिवाज से पूजन प्रक्रिया शुरू की। सबसे पहले नवग्रह पूजन संपन्न कराया गया, ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान निर्विघ्न पूरे हो सकें। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में विद्या की देवी मां वाग्देवी (सरस्वती) के चित्र को श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया। श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती का विशेष श्रृंगार कर महाआरती की और सुख-समृद्धि की कामना की।

इस आयोजन का मुख्य केंद्र भोजशाला की यज्ञशाला रही, जहां विशेष यज्ञ कुंडों में आहुतियां दी गईं। श्रद्धालुओं ने इसे वर्षों पुराने “भोजशाला मुक्ति” संकल्प की पूर्णता का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय राज्य मंत्री Savitri Thakur ने कहा कि भोजशाला को अयोध्या की तर्ज पर विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाकर यहां स्थापित करने की दिशा में पहल की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान एक अहम धार्मिक प्रतीक के रूप में अखंड ज्योति को भी भोजशाला के मूल गर्भगृह में स्थापित किया गया। बताया गया कि भोजशाला की “पूर्ण मुक्ति” के संकल्प के साथ पिछले कई वर्षों से ‘ज्योति मंदिर’ में यह अखंड ज्योति प्रज्वलित की जा रही थी। रविवार को पूरे विधि-विधान और गाजे-बाजे के साथ उस अखंड लौ को ज्योति मंदिर से लाकर भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित किया गया।

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। अखंड ज्योति की स्थापना और वर्षों पुराने संकल्प की पूर्णता के बाद पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
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