5 जून 2026। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में भारतीय कंपनियों के लिए रूस में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश के नए अवसर उभर रहे हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF 2026) में रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए यह एक "विशेष अवसर" है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मेक इन इंडिया' पहल का उल्लेख करते हुए कुमार ने कहा कि इसी मॉडल को अपनाकर भारत और रूस अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों के लिए रूस में उत्पादन करना एक नया और महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा है।
राजदूत ने खनिज संसाधन, आवश्यक कच्चे माल और उर्वरक जैसे क्षेत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जहां भारतीय और रूसी कंपनियां संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) स्थापित कर सकती हैं। उनके अनुसार, इससे भारत के लिए एक स्थायी निर्यात बाजार विकसित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्राकृतिक संसाधनों, मानव संसाधन और श्रम गतिशीलता का बेहतर उपयोग करना चाहिए ताकि दिसंबर में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin द्वारा निर्धारित 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
कुमार ने बताया कि हाल के वर्षों में रूस में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की संख्या बढ़कर लगभग एक लाख हो गई है।
उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए मौजूदा सहयोगी ढांचे को और प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम किए जा सकें और आपूर्ति तंत्र अधिक मजबूत बन सके।
राजदूत के अनुसार, कंपनियों को नई विनिर्माण इकाइयों और सप्लाई चेन नेटवर्क के विकास पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भारत सहित तीसरे देशों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
डिजिटल क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, UPI हर महीने 18 अरब से अधिक लेनदेन संसाधित करता है और यह दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों में से एक है।
कुमार ने कहा कि मोदी और पुतिन द्वारा शुरू किया गया आर्थिक सहयोग कार्यक्रम दोनों देशों के लिए एक साझा रोडमैप है, जिसमें ऊर्जा, परिवहन, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि तेल और गैस से लेकर असैन्य परमाणु ऊर्जा तक, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दशकों से भारत-रूस संबंधों की मजबूत नींव रहा है।















