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स्मार्टफोन को ट्रैक होने से बचाने का कोई तरीका नहीं, सरकारें और एजेंसियां कर रही डाटा का इस्तेमाल

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: prativad                                                                         Views: 3185

Bhopal: 04 मार्च 2023। स्मार्टफोन जितनी सहूलियत वाला गैजेट है, उतनी ही हमारे लिए यह मुसीबत भी है। यदि आपके पास स्मार्टफोन है तो आप समझ लीजिए कि आपका निजी जीवन नहीं है। आपकी सब चीजें सार्वजनिक है। स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी में इस तरह से घुसपैठ बनाई है कि हमसे ज्यादा इसे हमारे बारे में जानकारी हासिल है। आमतौर पर हम ट्रैकिंग से बचने के लिए फोन की लोकेशन और इंटरनेट को बंद कर देते हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके बावजूद भी आपकी ट्रैकिंग लगातार हो रही है और यह सब सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए हो रहा है।

टावर के जरिए ट्रैकिंग
वैसे तो आपको ट्रैकिंग इंटरनेट के जरिए ही होती है लेकिन जब आप मोबाइल फोन की लोकेशन ऑफ कर देते हैं तब आपकी ट्रैकिंग मोबाइल टावर और वायरलेस नेटवर्क के जरिए होती है। इस तरह की ट्रैकिंग को सैटेलाइट ट्रैकिंग भी कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकेशन ऑफ करने से मोबाइल एप्स के लिए लोकेशन बंद होती है, ना कि मोबाइल फोन के लिए है। मोबाइल फोन की लोकेशन को ऑफ करना बहुत ही मुश्किल है।

सरकार और कंपनियां कर रहीं डाटा का इस्तेमाल
सैटलाइट कनेक्टिविटी के लिए जुटाए गए डाटा का इस्तेमाल दुनिया की कई सरकारें और कंपनियां कर रही हैं। इन डाटा से लोगों की माली हालत, खर्च के तरीके, स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति के अलावा लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा है। आपको याद ही होगा कि कुछ साल पहले जर्मनी के एक नेता माल्ट स्पित्ज ने एक मोबाइल कंपनी पर सैटेलाइट डेटा ट्रैकिंग को लेकर मुकदमा किया था। माल्ट का दावा था कि लोकेशन ऑफ होने के बाद उनके फोन की ट्रैकिंग की गई।
कैसे होती है ट्रैकिंग
यदि आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी लोकेशन को ट्रैक करना आसान हो जाता है लेकिन जब आप इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करते हैं तब भी आपकी ट्रैकिंग मोबाइल टावर के जरिए होती है, क्योंकि आपका फोन यदि ऑन है तो वह हर हाल में किसी सैटेलाइट और मोबाइल टावर से कनेक्ट रहता है। फोन में ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) के जरिए लोकेशन ट्रैक होती है। इस डाटा को नेशनल मेरीटाइम इलेक्ट्रॉनिक एसोसिएशन (एनएमईए) के पास भेजा जाता है जिसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और यहां से दुनिया के किसी भी मोबाइल का डाटा निकाला जा सकता है। एनएमईए मोबाइल यूजर्स का डाटा पैसे लेकर बेचता भी है।

बचने का तरीका क्या है?
स्मार्टफोन को ट्रैक होने से बचाने का कोई तरीका नहीं है। सरकारें और एजेंसियां आपको जब चाहे ट्रैक कर सकती हैं लेकिन कुछ मोबाइल एप्स को आप ट्रैकिंग से रोक सकते हैं।

आप स्मार्टफोन को ट्रैक होने से बचाने के कुछ तरीके जरूर अपना सकते हैं:
गूगल मैप से लोकेशन सेवा बंद करें - आप अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल गूगल मैप्स एप्लिकेशन को ओपन करें और इसमें जाकर लोकेशन सेवा को बंद कर सकते हैं।
अनुशंसित ऐप इंस्टॉल करें - अगर आप अपने स्मार्टफोन में कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो आपको उस ऐप के लाभ और सुरक्षा विवरणों को पढ़ना चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार, आपको अनुशंसित ऐप इंस्टॉल करना चाहिए जो स्कैनिंग, वायरस व एंटी-स्पाईवेयर फ़ीचर्स के साथ आता हो।
फ़ोन में संकेत बंद करें - अगर आप अपने स्मार्टफोन को ट्रैक होने से बचाना चाहते हैं, तो आप फोन में संकेत बंद कर सकते हैं।
वाईफ़ाई और ब्लूटूथ बंद करें: स्मार्टफोन को ट्रैक करने के लिए ब्लूटूथ या वाईफ़ाई के आधार पर लोकेशन का पता लगाया जाता है। अतः, आप जब नहीं इस्तेमाल कर रहे हों तब इन्हें बंद कर सकते हैं।
स्मार्टफोन के लिए एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें: आप एंटीवायरस सॉफ्टवेयर की मदद से अपने स्मार्टफोन को वायरस और मैलवेयर से बचा सकते हैं। ऐसे सॉफ्टवेयर से आप अपने स्मार्टफोन को हैक होने से भी बचा सकते हैं।

यदि आप अपनी प्राइवेसी को लेकर बेहद गंभीर हैं तो आपको फीचर फोन का इस्तेमाल करना चाहिए, हालांकि ट्रैकिंग इसकी भी हो सकती है लेकिन इसमें सिर्फ आपकी लोकेशन ही मिलेगी।

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