🔴 TRENDING NOW!
ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी भारत की अगली रक्षा लड़ाई सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमानों से नहीं, AI और Cyber Security से भी होगी हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा ने ‘यारी की नई वाइब’ के साथ यारी को दिया नया अंदाज़ कूनो फिर हुआ गुलजार, मादा चीता केजीपी12 के परिवार में आए चार नन्हे शावक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत के सरकारी और रक्षा संस्थानों पर साइबर खतरा, APT36 के नए Malware अभियान से अलर्ट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत, स्वामित्व अधिकार योजना के तहत 50 लाख संपत्तियों की होगी फ्री रजिस्ट्री

साइंस फिक्शन से हकीकत में आई तकनीक: आंखें बंद होने पर भी अब कॉन्टैक्ट लेंस से देख सकेंगे इंफ्रारेड लाइट!

👤
prativad
👁 2752 व्यूज
📍 नई दिल्ली
साइंस फिक्शन से हकीकत में आई तकनीक: आंखें बंद होने पर भी अब कॉन्टैक्ट लेंस से देख सकेंगे इंफ्रारेड लाइट!
नई तकनीक ने बदली दृष्टि की सीमाएं, अब अदृश्य को भी देख पाएंगे इंसान

29 मई 2025, टेक्नोलॉजी डेस्क | Prativad.com

अब वह समय दूर नहीं जब इंसान अदृश्य चीजों को भी देख सकेगा—और वह भी अपनी आंखें बंद रखते हुए। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अद्भुत कॉन्टैक्ट लेंस तकनीक विकसित की है, जो इंफ्रारेड (IR) लाइट को विज़िबल लाइट में बदल देती है। इसका मतलब यह है कि अब इंसान वो इंफ्रारेड किरणें भी देख सकेगा, जो सामान्य आंखें नहीं देख पातीं।

क्या है यह नया आविष्कार?
यह कॉन्टैक्ट लेंस खास नैनोमटीरियल से बनाए गए हैं, जो इंफ्रारेड लाइट को पकड़कर उसे मानव आंखों द्वारा देखे जा सकने वाले विज़िबल स्पेक्ट्रम में बदल देते हैं। इतना ही नहीं, इस लेंस की सबसे खास बात यह है कि यह तकनीक बंद आंखों पर भी काम करती है। यानी, लेंस आपकी पलकों के पार से भी इंफ्रारेड सिग्नल्स को डिटेक्ट कर सकते हैं।

कैसे करता है काम?
इस लेंस में एक अत्याधुनिक क्वांटम डॉट तकनीक का उपयोग किया गया है, जो इंफ्रारेड फोटॉन्स को विज़िबल फोटॉन्स में बदलती है। यह लेंस किसी बाहरी पॉवर सोर्स की ज़रूरत के बिना काम करता है और इसे पहनने वाला व्यक्ति अंधेरे में भी चीज़ों को देख सकता है—जैसे कि सैन्य या सुरक्षा ऑपरेशन्स में आवश्यक होता है।

संभावनाओं का नया संसार
सुरक्षा और सेना: अंधेरे या धुएं से भरे इलाकों में बेहतर विज़न।
मेडिकल उपयोग: शरीर की ऊष्मा से जुड़ी बीमारियों की जांच में सहायक।
ऑगमेंटेड रियलिटी: नई जेनरेशन की एआर तकनीक को और अधिक इंटरएक्टिव बनाया जा सकता है।
नेत्रहीनों के लिए वरदान: भविष्य में यह तकनीक दृष्टिहीनों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है।

विशेषज्ञों की राय
नैनोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, “यह तकनीक भविष्य में न केवल हमारी देखने की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती है, बल्कि इंसानी संवेदनाओं की परिभाषा को भी बदल देगी। जैसे-जैसे लेंस हल्के, सस्ते और जन-सुलभ होंगे, इसका उपयोग आम जनता तक भी पहुंचेगा।”

साइंस फिक्शन अब हकीकत बन रही है। यह इंफ्रारेड-कैपेबल कॉन्टैक्ट लेंस न सिर्फ रक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा क्षेत्रों में क्रांति ला सकते हैं, बल्कि आम जीवन में भी दृष्टि की नई परिभाषा गढ़ सकते हैं।
Tags :