भोपाल 4 अक्टूबर 2021। प्रदेश में अब डायवर्सन वाली भूमि तथा ग्रामीण क्षेत्र में भू-अधिकार पुस्तिका वाली भूमि पर बैंक से आसानी से ऋण मिल सकेगा। इसके लिये सर्च रिपोर्ट की भी आवश्यक्ता नहीं होगी। इस संबंध में राजस्व विभाग ने वित्त विभाग से आग्रह किया था तथा वित्त विभाग ने सभी बैंकों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिये हैं।
राजस्व विभाग ने अपने आग्रह में कहा है कि भूमि के डायवर्सन के लिये प्रावधान है कि आवेदक सिर्फ सूचना देगा तथा ऐसी डायवर्सन वाली भूमि पर बकाया राशि के भुगतान की पावती ही डावर्सन का प्रमाण माना गया है। इसके अलावा, खसरा नकल में डायवर्सन प्रयोजन भी होता है। बैंक इन्हें ही डायवर्सन का प्रमाण माने एवं ऋण स्वीकृत करें तथा अलग से डायवर्सन का प्रमाण-पत्र आवेदकों से न मांगें।
इसी प्रकार, राजस्व विभाग ने भू-अधिकार पुस्तिका पर ऋण स्वीकृत करने के लिये कहा है। उसने बताया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी का सर्वेक्षण कर सम्मपत्तिधारी के अधिकार अभिलेख के निर्माण की योजना का क्रियान्वयन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है जिसके तहत 25 सितम्बर 2018 के पूर्व की आबादी पर अधिभोगी सम्पत्तिकत्र्ता कों अधिकर अभिलेख उपलब्ध कराये जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश के 30 जिलों में सर्वेक्षण का कार्य प्रगतिरत है जिसमें से हरदा जिले के सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसलिये सर्वेक्षण उपरान्त सम्पत्तिधारी के तैयार होने वाले अधिकार अभिलेख के आधार पर सम्पत्तिधारी को आवश्यक्ता होने पर गृह ऋण एवं अन्य समस्त ऋण उपलब्ध कराये जायें। जिन ग्रामों में सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है, उन ग्रामों के खसरे, नक्शे एवं अधिकार अभिलेख को सम्पत्ति के क्रय-विक्रय करने, बंधक रखने एवं समस्त प्रकार के ऋण प्राप्त करने की सुविधा की दृष्टि से एमपी भू-अभिलेख पोर्टल पर उसी प्रकार उपलब्ध कराया गया है जिस प्रकार से कृषि भूमि के अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इसलिये कृषि भूमि के समान ही ग्रामीण सम्पत्ति को ऑनलाईन बंधक दर्ज करते हुये गृह ऋण एवं अन्य ऋण प्रदान किये जायें। इससे ऋण लेने पर आवेदक की सम्पत्ति की सर्च रिपोर्ट की आवश्यक्ता नहीं होगी।
डॉ. नवीन जोशी
डायवर्सन और भू-अधिकार वाली भूमि पर अब बैंक से ऋण मिल सकेगा
Place:
Bhopal 👤By: DD Views: 1622
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