16 सितंबर 2017। प्रदेश के 51 में से 35 जिलों में अवर्षा या कम वर्षा की ताजा स्थिति को देखते हुये राज्य सरकार द्वारा बरती जा रही सतर्कता का पहला असर यह हुआ है कि उसने राज्य के जल संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी बेराज और स्टाम डेम के शटर बंद करने के निर्देश दिये हैं जिससे जल संग्रहित किया जा सके। शटर बंद करने की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के लिये कहा गया है।
राज्य सरकार ने इसके अलावा बांधों के क्षतिग्रस्त स्ट्रक्चर में सेंड बेग की सहायत से नाला क्लोजर करने के लिये भी कहा है। बांधों में संग्रहित जल को सर्वप्रथम पेयजल हेतु आरक्षित रखने के निर्देश दिये गये हैं तथा पेयजल की मांग के अनुसार जल संग्रहित करने के बाद शेष बचे जल के आधार पर सिंचाई के लिये पानी छोडऩे का कार्यक्रम तैयार करने के लिये कहा है।
राज्य सरकार ने अवर्षा की स्थिति को देखते हुये कहा है कि कृषकों को कम पानी की फसल लेने के लिये शिक्षित एवं प्रोत्साहित किया जाये। सिंचाई के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहे विशेषज्ञों की इसमें मदद लेने के निर्देश दिये गये हैं। ज्ञातव्य है कि प्रदेश के अवर्षा या कम वर्षा वाले 35 जिलों में जबलपुर, बालाघाट, छिन्दवाड़ा, सिवनी, मण्डला, डिण्डौरी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सीधी, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, अलीराजपुर, देवास, शाजापुर, मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, हरदा, बैतूल और होशंगाबाद शामिल हैं।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के बड़े बांधों में अभी तक एक भी ऐसा नहीं है जिसमें से शटर खोलकर पानी छोड़ा जाये। प्रदेश के करीब सात सौ बेराज एवं स्टाप डेम में पानी बचाये रखने के लिये उनके शटर बंद किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। सरकारी अवर्षा में पहली प्राथमिकता पेयजल एवं उसके बाद सिंचाई है।
- डॉ नवीन जोशी

अवर्षा का असर : सभी बेराज-स्टाप डेम के शटर बंद करने के निर्देश
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Bhopal 👤By: DD Views: 18110
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