27 अगस्त 2019। प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को अब राज्य सरकार विघटित कर नवीन चुनाव होने तक उनमें भारसाधक अधिकारी नियुक्त कर सकेगी। यह अधिकार लेने के लिये पहले राज्य सरकार ने गत 8 मार्च 2019 को अध्यादेश जारी किया था जिसकी वैधता छह माह थी परन्तु इसके पहले ही सरकार ने विधानसभा के पिछले बजट सत्र में विधेयक पारित करा दिया और अब नये राज्यपाल लालजी टण्डन ने इस विधेयक को मंजूरी प्रदान कर इसे कानूनी रुप प्रदान कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश की 257 कृषि उपज मंडियों का कार्यकाल 6 जनवरी 2019 को समाप्त हो गया था और राज्य सरकार ने इनके संचालन के लिये भारसाधक अधिकारी नियुक्त कर दिये थे। कई मंडियां टूटकर एक से दो भी बनाई गई थीं और उसमें भी चुनाव कराने थे। परन्तु लोकसभा चुनाव के चलते इनके चुनाव नहीं कराये जा सके थे। इसी लिये राज्य सरकार ने मंडी समितियों के विघटन और भरसाधक अधिकारी नियुक्त करने के कानूनी अधिकार अपने पास ले लिये हैं जिससे कोई उच्च न्यायालय जाकर स्थगन आदेश नहीं ले आये।
दरअसल कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में प्रावधान था कि मंडी समितियां पांच वर्ष की कालावधि के यिे निर्वाचित होंगी और उनके कार्यकाल में अधिकतम एक वर्ष की वृध्दि की जा सकेगी। मंडी समितियों के विघटन और उनके भारसाधक अधिकारी नियुक्त करने के कोई उपबंध नहीं थे इसीलिये यह कानून लाया गया है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि सरकार ने मंडी समितियों के विघटन और उनमें भारसाधक अधिकार नियुक्त करने के कानूनी अधिकार प्राप्त कर लिये हैं। अब इनके चुनाव कब तक होंगे यह सरकार के ऊपर निर्भार रहेगा।
- डॉ. नवीन जोशी
अब कृषि उपज मंडियों को सरकार विघटित और नवीन भारसाधक अधिकारी नियुक्त कर सकेगी
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