28 मई 2021। शिवराज सरकार प्रदेश में पुरानी यात्री बसों जोकि सवारी को उठाने, ढोने एवं उतारने में संलग्न हैं, को परमिट न देने के लिये दस साल पुरानी विसंगति दूर करने जा रही है। इस संबंध में उसने मप्र मोटरयान नियम 1994 में संशोधन प्रस्तावित कर दिया है जो जल्द प्रभावशील कर दिया जायेगा।
दरअसल, राज्य सरकार ने दस वर्ष पूर्व 2011 में प्रावधान किया था कि ऐसी यात्री बसें जो अंतर्राज्यीय मार्गों पर चलती हैं और उनके विनिर्माण को दस वर्ष पूरे हो गये हैं, को परमिट नहीं देगी। साथ ही यह भी प्रावधान किया था कि जो यात्री बसें राज्य के भीतर साधारण मार्ग पर चलती हैं और उनके विनिर्माण के 15 वर्ष पूर्ण हो गये हैं, उन्हें भी परमिट नहीं जारी किया जायेगा। लेकिन उस समय यह भी प्रावधान कर दिया गया था कि वर्ष 2011 के पूर्व उक्त दोनों तरह की पंजीकृत यात्री बसों पर ये दोनों प्रावधान लागू नहीं होंगे अर्थात 10 एवं 15 वर्ष के बाद परमिट न देने के उपबंध लागू नहीं किये जायेंगे।
इससे हो यह रहा था कि यात्री बस के स्वामी कोर्ट में जाकर राहत प्राप्त कर रहे थे और उन्हें परिवहन विभाग को परमिट देना पड़ रहा था। इसीलिये अब नया प्रावधान प्रस्तावित किया गया है कि वर्ष 2011 के पहले पंजीकृत यात्री बसों पर भी 10 एवं 15 वर्ष वाले उपबंध लागू होंगे और उन्हें भी विनिर्माण के बाद निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद परमिट जारी नहीं किये जायेंगे।
- डॉ. नवीन जोशी
पुरानी यात्री बसों को परमिट न देने हेतु विसंगति दूर होगी, जारी किया संशोधन
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Bhopal 👤By: DD Views: 2129
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