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मध्यप्रदेश में सायबर पंजीयन की शुरुआत, पेपरलेस और कैशलेस व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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📍 भोपाल
मध्यप्रदेश में सायबर पंजीयन की शुरुआत, पेपरलेस और कैशलेस व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
16 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश में पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल दौर में प्रवेश कर गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंजीयन भवन में सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासन में पारदर्शिता, गति और नवाचार को प्राथमिकता दे रही है, और सायबर पंजीयन उसी सोच का विस्तार है।

प्रदेश अब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर ऑफ अटॉर्नी, पार्टनरशिप डीड समेत 75 से अधिक सेवाओं का सायबर पंजीयन शुरू किया गया है। इससे न केवल कागजी कामकाज कम होगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया कैशलेस और पारदर्शी बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण संरक्षण और सुगमता दोनों लिहाज से अहम साबित होगी।

उन्होंने बताया कि अब शासन और उसके उपक्रमों से जुड़े अंतरण दस्तावेज भी पेपरलेस माध्यम से पंजीकृत किए जाएंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण के अंतरण मामलों में लोगों को पंजीयन कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वीडियो केवाईसी के जरिए पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि “संपदा 2.0” को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिला है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन इस प्रणाली के तहत हो चुका है। प्रदेश के 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना लागू की जा चुकी है, जिसके माध्यम से राजस्व बंटवारा और नामांतरण जैसी प्रक्रियाएं भी डिजिटल तरीके से की जा रही हैं।

उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि वर्ष 2024-25 में एडवांस सॉफ्टवेयर “संपदा 2.0” लागू किया गया, जिससे चल और अचल संपत्तियों के दस्तावेज पूरी तरह डिजिटल रूप से पंजीकृत हो रहे हैं। कुछ सेवाओं के लिए उप-पंजीयक कार्यालय जाने की भी जरूरत नहीं है। इस सॉफ्टवेयर का पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले गुना, हरदा, रतलाम और डिंडौरी जिलों में सफलतापूर्वक संचालित किया गया था, जिसके बाद इसे प्रदेशभर में लागू किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के इन नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। पंजीयन प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाने के लिए लगभग 14 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव अमित राठौर, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह तथा महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक अमित तोमर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े।
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