28 अप्रैल 2023। प्राकृतिक रूप से वनों से आच्छादित, खनिज संपदा से परिपूर्ण छत्तीस गढ़ों का गढ़ छत्तीसगढ़ जोकि धान का कटोरा नाम से प्रसिद्धि पाकर शान्ति का स्वरूप भाईचारे का प्रतीक माना जाता रहा है, जहाँ दो वर्ष पश्चात फिर ग्यारह परिवार नक्सलियों की भेंट चढ़ गये। बड़ी वेदना होती है कि जो जवान देश की रक्षा करते करते स्वयं अपने प्राणों की वही ऐसे हादसों में देते हैं उनके परिवारों की आज की दुखमयी स्थिति का लेखन करना दूभर है बस उनके प्रति यही कहा जा सकता है।
नमन करो अभिनंदन कर लो, भारतमाता के रखवालों को। प्राणों की बली देन वाले, अमर शहीद जवानों को।। बस्तर दन्तेवाड़ा का दशहरा जो जगजाहिर रहा है। जहाँ देश विदेश का पर्यटक आकर प्राकृतिक छटा में आहलादित बोते रहे हैं, आज यह नक्सीकयों के कारण अशान्ति रूपी खून का अखाड़ा बन गया है। इन नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकने हेतु केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा पुरजोर कोशिशें की जा रही है। किन्तु दोनों सरकारों के बीच आधुनिक तकनीक की कुछ कमी महसूस होती है। जिससे पूर्ण सफलता नही मिल पा रही है। शहीद हुये जवानों के दुखी परिवारों के प्रति छत्तीसगढ़ तथा भारतवासियों की सहानभूतियों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश केन्द्रीय मंत्री अमितशाह की भी सहानभूति है। किन्तु इनसे अपना 'मुआवजा राशि से दुखी परिवारों का दुख का धाव नही भरा जा सकता। दुखी परिवारों के लिय यह अपूर्णनीय क्षति है।
वर्ष 2010 से वर्तमान तक करतीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा जवानों पर बड़े बड़े हमले किये जाते रहे हैं जिसमें चार सौ से अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। इस रक्तरंजित खेल की इति करने हेतु केन्द्र तथा राज्य सरकार की पूर्ण तन्मयता आवश्यक है। साथ ही साथ आधुनिक तकनीकी यत्रों का पूर्ण उपयोग किया जाना अब अतिआवश्यक है। ताकि धान का कटोरा कहा जाने वाला। छत्तीसगढ़ में शान्ति, अमन का वातावरण बरकरार रह सके तथा असमय वीरगति को प्राप्त हो रहे जवानों के परिवारों को इस असहनीय पीड़ा से कुछकारा मिल सक।
छत्तीसगढ़ से आनंद चौब
संपर्क : 9329885697

छत्तीसगढ़ की हृदय विहारक घटनाओं पर अब रोक जरुरी
Place:
बोड़ला 👤By: prativad Views: 1013
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