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मध्य प्रदेश सरकार और डिजिटल इंडिया ‘भाषिणी’ के बीच एमओयू, बहुभाषी डिजिटल शासन को मिलेगी गति

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 161

15 जनवरी 2026। भोपाल में आयोजित मध्य प्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस–2026 के दौरान मध्य प्रदेश सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह सम्मेलन राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इंडिया एआई मिशन के सहयोग से आयोजित किया था, जिसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, शिक्षाविद और केंद्रीय एजेंसियां शामिल हुईं।

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी शासन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रणनीतिक आधार बना रहा है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में जल्द ही मिशन मोड में राज्य स्तरीय एआई नीति लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि भाषिणी जैसे बहुभाषी प्लेटफॉर्म भाषा और क्षेत्रीय बाधाओं को तोड़कर एआई आधारित शासन को आम नागरिक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए इस एमओयू के तहत राज्य सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भाषिणी की भाषा तकनीकों, अनुवाद एपीआई और एआई आधारित भाषा टूल्स को जोड़ा जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवाएं कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हों और नागरिकों को भाषा के कारण किसी तरह की डिजिटल बाधा न झेलनी पड़े।

इस साझेदारी के जरिए भाषिणी, मध्य प्रदेश में आवाज-आधारित और बहुभाषी एआई समाधानों को मजबूत करेगा। खास तौर पर दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच और समावेशिता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। यह पहल भाषिणी की उस राष्ट्रीय सोच के अनुरूप है, जिसमें भारतीय भाषाओं को देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अभिन्न हिस्सा बनाने का लक्ष्य है।

एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिव और इंडिया एआई के सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा कि मजबूत एआई सिस्टम के लिए भाषा डेटा बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि भाषिणी भारतीय भाषाओं में निर्बाध अनुवाद को संभव बनाकर डिजिटल सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा शहरी विकास एवं आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि भाषिणी के एकीकरण से राज्य के डिजिटल प्लेटफॉर्म बहुभाषी रूप से काम कर सकेंगे, जिससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि के नागरिकों को समान रूप से सेवाएं मिलेंगी।

सम्मेलन में डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने ‘सभी के लिए तकनीक आधारित शासन’ विषय पर सत्र में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि एआई अपनाना एक सतत प्रक्रिया है, जो वास्तविक उपयोग, फीडबैक और मॉडल सुधार से आगे बढ़ती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डेटा ही एआई की नींव है और समावेशी व स्केलेबल भाषा एआई सिस्टम के लिए निरंतर डेटासेट निर्माण जरूरी है।

कुल मिलाकर, सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने यह साफ कर दिया कि भाषिणी भारत के एआई आधारित शासन दृष्टिकोण का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है, जहां भाषाई विविधता को बाधा नहीं, बल्कि डिजिटल समावेशन की ताकत माना जा रहा है।

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