नई दिल्ली 19 जनवरी 2026। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने में की गई देरी पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि महीनों तक फैसला लटकाए रखना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही, मंत्री द्वारा दी गई माफी को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह तय करने का निर्देश दिया है कि विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी जाए या नहीं। यह आदेश उस समय आया जब विशेष जांच दल (SIT) द्वारा अभियोजन की अनुमति मांगे जाने के बावजूद सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ मंत्री विजय शाह की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें उन्होंने हाई कोर्ट के स्वतः संज्ञान आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में पुलिस को FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
पीठ ने सवाल उठाया कि अगस्त 2025 से SIT की रिपोर्ट लंबित होने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक अभियोजन मंजूरी पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया। कोर्ट ने कहा कि 19 जनवरी 2026 हो चुकी है और SIT स्पष्ट रूप से अभियोजन की अनुमति मांग चुका है।
सुनवाई के दौरान मंत्री के वकील ने यह तर्क दिया कि विजय शाह पहले ही अपने बयान के लिए माफी मांग चुके हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल माफी मांग लेना इस मामले में पर्याप्त नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला 11 मई 2025 को इंदौर के महू में दिए गए विजय शाह के एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र करते हुए आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी की थी। इस बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों के समुदाय की बहन कहा था, जिसके बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
14 मई 2024 को हाई कोर्ट ने इस बयान का स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 152, 196(1)(b) और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज किया गया। उसी दिन शाम को विजय शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर माफी मांगी और कर्नल कुरैशी को “राष्ट्र की बहन” बताया।
हालांकि, 15 मई को हाई कोर्ट ने FIR की भाषा और प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए कहा था कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए वह मामले की निगरानी करेगा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को तीन सदस्यीय SIT गठित कर विस्तृत जांच के आदेश दिए थे।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण ठाकुर, जिन्होंने मंत्री की बर्खास्तगी की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, ने कहा कि कोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते का स्पष्ट समय दिया है और यह भी साफ कर दिया है कि माफी के आधार पर मामला खत्म नहीं किया जा सकता।














