17 अप्रैल 2026। भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत इंडियाएआई मिशन ने “इंडियाएआई स्टार्टअप्स ग्लोबल एक्सेलरेशन प्रोग्राम” के दूसरे बैच के लिए 10 चुनिंदा भारतीय स्टार्टअप्स की घोषणा की है। यह पहल फ्रांस के स्टेशन एफ और एचईसी पेरिस के सहयोग से चलाई जा रही है।
इस बैच में हेल्थटेक, क्लाइमेट टेक, एडटेक, सैटेलाइट इंटेलिजेंस और कॉग्निटिव एआई जैसे विविध क्षेत्रों के स्टार्टअप्स शामिल हैं। मकसद साफ है—भारतीय AI स्टार्टअप्स को सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक खिलाड़ी बनाना।
यह प्रोग्राम इंडियाएआई मिशन के स्टार्टअप फाइनेंसिंग पिलर के तहत शुरू किया गया था। हर बैच में 10 स्टार्टअप्स को चुना जाता है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए जरूरी संसाधन, मेंटरशिप और नेटवर्किंग सपोर्ट दिया जाता है।
सरकार की राष्ट्रीय AI रणनीति के अनुरूप यह पहल सीमा पार सहयोग, ज्ञान आदान-प्रदान और वैश्विक बाजारों तक पहुंच पर जोर देती है। इसका सीधा लक्ष्य है—नवाचार को बढ़ावा देना और भारतीय AI सेक्टर में वैश्विक निवेश आकर्षित करना।
चुने गए 10 स्टार्टअप्स और उनका फोकस
एआई हेल्थ हाईवे इंडिया: स्मार्ट स्टेथोस्कोप के जरिए हृदय और श्वसन रोगों की AI आधारित जांच
अविरोस: विज़न AI प्लेटफॉर्म जो भौतिक वातावरण में स्मार्ट ऑटोमेशन सक्षम करता है
कॉग्नेक्टो: AI इन्फ्रास्ट्रक्चर इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म
फ्लॉन्ट: फैशन और वीडियो मार्केटिंग के लिए मल्टीमॉडल AI एजेंट
ग्रीनएफआई.एआई: ESG (पर्यावरण, सामाजिक, गवर्नेंस) जोखिम प्रबंधन के लिए AI सॉफ्टवेयर
इन्फीहील हेल्थटेक: “हीलो” नाम का बहुभाषी AI मेंटल हेल्थ असिस्टेंट
इनलस्ट्रो लर्निंग: AI आधारित जॉब सिमुलेशन और स्किल वैलिडेशन प्लेटफॉर्म
प्रेडको: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए AI आधारित अनुपालन समाधान
स्काईसर्व (हाइस्पेस टेक्नोलॉजीज): पृथ्वी और अंतरिक्ष निगरानी के लिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर
टेस्टएआईएनजी सॉल्यूशंस: AI सिस्टम्स के लिए क्वालिटी और कंप्लायंस सूट
इन स्टार्टअप्स का चयन एक सख्त बहु-स्तरीय प्रक्रिया के जरिए किया गया है। अब ये सभी पेरिस के स्टेशन एफ में भारत के AI इकोसिस्टम का प्रतिनिधित्व करेंगे।
कैसे काम करेगा प्रोग्राम
प्रोग्राम की शुरुआत 3 हफ्ते के ऑनलाइन प्रिपरेशन मॉड्यूल से होगी, जिसके बाद पेरिस में 3 महीने का रेजिडेंशियल एक्सेलरेशन फेज होगा। इस दौरान स्टार्टअप्स को यूरोप के टॉप इनोवेशन इकोसिस्टम, निवेशकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा।
बड़ा लक्ष्य क्या है?
सीधी बात—भारत AI में सिर्फ भागीदार नहीं, लीडर बनना चाहता है। यह पहल उसी दिशा में एक रणनीतिक कदम है। फोकस है जिम्मेदार, स्केलेबल और समावेशी AI समाधान तैयार करना, जो ग्लोबल मार्केट में टिक सकें।
अगर ये स्टार्टअप्स सही दिशा में स्केल करते हैं, तो आने वाले सालों में “मेड इन इंडिया AI” सिर्फ टैगलाइन नहीं, एक मजबूत ब्रांड बन सकता है।














