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भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर ने संघर्ष, परिश्रम, दूरदृष्टि, सादगी को जीवन में अंगीकार कर देश को आगे बढ़ाने का कार्य किया- विधानसभा अध्यक्ष तोमर

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 93

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के भारत रत्न कपूरी ठाकुर की पहली प्रतिमा सागर में हुई स्थापित

सागर 11 अप्रैल 2026। भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर ने संघर्ष, परिश्रम, दूरदृष्टि, सादगी को जीवन में अंगीकार कर देश को आगे बढ़ाने का कार्य किया। उक्त विचार विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सागर में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में व्यक्त किए।

विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी के चरणों में अपनी ओर से श्रद्धा व्यक्त करता हूं और उनके चरणों में नमन करता हूं। इस अवसर के हम साक्षी बन पा रहे हैं, इसके लिए रघु ठाकुर जी को हृदय से बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। रघु ठाकुर जी मौलिक विचारक हैं, राजनीतिक क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक मूल्यों के प्रति उनका समर्पण रहा। इस कारण राजनीति में पदों की दौड़ में वह बिछड़ते हुए दिखाई देते होंगे, लेकिन सम्मान की दृष्टि से रघु ठाकुर की तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। ऐसे रघु भाई हमारे परम मित्र हैं।

उन्होंने मुझे आग्रह किया था कि इस अवसर पर मैं उपस्थित रहूं, तो कर्पूरी ठाकुर जी का विषय था। मैंने बहुत उनसे चर्चा भी नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा तो मैंने हां कर दिया था और इस परिप्रेक्ष्य में मैं आज यहां उपस्थित हुआ हूं और उपस्थित होकर निश्चित रूप से मैं बहुत ही अपने आप को गौरव का अनुभव कर रहा हूं।

श्री राजभूषण उनके क्षेत्र की यात्रा के साक्षी रहे और उन्होंने बहुत ही प्रेरणादायक विषय हम सब लोगों के सामने रखा है। मैं समझता हूं ऐसे अवसर न सिर्फ भाषण के लिए होते हैं, न सिर्फ प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के लिए होते हैं, ऐसे अवसर प्रेरणा लेने के लिए होते हैं। इस अवसर से हम प्रेरणा लें, कर्पूरी जी के व्यक्तित्व को, कृतित्व को, उनकी साधना को, उनके संघर्ष को, उनके समर्पण को, उनकी संवेदनशीलता को, उनकी दूरदृष्टि को अपने जीवन में अगर हम अंगीकार करें तो अपने जीवन को भी सार्थक बना सकते हैं और देश के कल्याण के लिए भी निश्चित रूप से कुछ करने में योगदान देने में हमारी भूमिका हो सकती है।

आज भौतिक प्रतिस्पर्धा का दौर है, इसलिए हर व्यक्ति प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे निकलना चाहता है, लेकिन समय-परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि प्रतिस्पर्धा के मानदंड बदलते जा रहे हैं। आज की प्रतिस्पर्धा सफलता की है, संपन्नता की है, संप्रदायता की है, यश की है और इस दौड़ में सब लोग दौड़े चले जा रहे हैं। अंजाम क्या होगा, मंजिल कहां मिलेगी, इसका किसी को मालूम नहीं है, लेकिन दौड़ने में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता है। लेकिन मैं इस अवसर पर कहना चाहता हूं कि मित्रों, हमारा यह देश और हमारी भारतीय संस्कृति ने कभी भी न तो हाड़-मांस के ढांचे की पूजा की और न ही पैसे की पूजा की। हमारी संस्कृति में हमेशा गुणों की पूजा हुई, नैतिकता की पूजा हुई। कोई टाटा-बिरला के बाद मानेगा या नहीं मानेगा, इसकी गारंटी नहीं है, लेकिन अगर सागर से गुजरा हुआ कोई फकीर कोई बात कह जाए तो उसकी मानने के लिए लोग विवश होते हैं। तो फकीरी में जीने वाला यह देश है, इसलिए आप स महसूस करते होंगे, एक कालखंड था जब हमारे देश में सैकड़ों रियासतें थीं, राजा-महाराजा, सुल्तान, बादशाह जगह-जगह पर थे। देश में कहीं भी चले जाओ, हर जगह राजा, सुल्तान, बादशाह की मूर्तियां और छतरियां आपको लगी हुई मिल जाएंगी। वे राजा भी थे, महाराजा भी थे, संपन्नता भी थी, आज भी संपन्नता दिखाई देती होगी, लेकिन बिना गुण के कोई उन मजारों पर पुष्प अर्पित करने और दिया जलाने नहीं जाता। जिसमें गुण था, उनकी पूजा होती है, चाहे वह महाराणा प्रताप हों, महर्षि दधीचि हों, कबीर जी हों, भक्त रविदास हों। कौन कहां का है, कौन बिरादरी का है, कौन किस मजहब का है, इससे कोई लेना-देना नहीं, लेकिन वे पूजित किए जाने वाले लोग हैं। योग्य गुणों में है, तो यह सारा समाज, सारा देश उनकी पूजा निश्चित रूप से करता है।

मंजिल खुद आकर कदम चूम लेती है, अगर पथिक हिम्मत न हारे। कर्पूरी ठाकुर की मूर्ति बेशक दशक बाद आज लगी हो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच में, लेकिन कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व ने लोगों को प्रेरणा देने का काम किया, तो कर्पूरी ठाकुर के पास भारत रत्न भी चलकर आया और कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी हम सब लोग विवश हुए। सब कहते हैं कर्पूरी ठाकुर के पास गाड़ी नहीं थी, उनके पास बैंक बैलेंस नहीं था, उनके पास बहुत अच्छे कपड़े नहीं थे, उनके पास बड़ी जमीन-जायदाद नहीं थी, लेकिन मैंने पूर्व में भी कहा, यह देश उन सब चीजों की पूजा करता ही नहीं है। यह देश पूजा करता है मानव के अंदर फकीरी और दूसरों के लिए जीने के जज्बे की, और वह जज्बा कर्पूरी जी में था। इसलिए आज हम सब लोग यहां उनको अपना श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

इस अवसर पर रामबहादुर राय अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, दिल्ली माननीय डॉ. राजभूषण चौधरी,जलशक्ति मंत्री,माननीय गोविन्द सिंह राजपूत,मंत्री, म.प्र. शासन भूपेन्द्र सिंह,विधायक एवं पूर्व मंत्री, शैलेन्द्र जैन विधायक, प्रदीप लारिया विधायक, श्रीमती संगीता तिवारी महापौर, नगर पालिका निगम, सागर वृन्दावन अहिरवार अध्यक्ष, नगर पालिका निगम, सागर रघु ठाकुर,समाजवादी चिंतक
सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्यजन कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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