13 जुलाई 2017। मध्यप्रदेश राज्य सरकार ने ढाई साल बाद स्टाम्प शुल्क अनुसूची में संशोधन कर दिया है। यह संशोधन तीन मदों में किया गया है।
पहला संशोधन हस्तांतरण-पत्र पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क के संबंध में किया गया है। पहले प्रावधान था कि कंपनियों के विलीनीकरण या समामेलन के संबंध में अंतरित स्थावर सम्पत्ति जोकि राज्य के भीतर स्थित है, के बाजार मूल्य के 5 प्रतिशत के बराबर रकम या ऐसे अंतरण के विनिमय में या अन्यथा जारी या आवंटित शेयरों के बाजार मूल्य तथा ऐसे अंतरण के लिये संदत्त प्रतिफल की रकम के योग का 0.5 प्रतिशत, इसमें से जो भी अधिक हो होगा। यानी इस सीमा तक स्टाम्प शुल्क प्राभार्य होगा। लेकिन अब संशोधन के जरिये अधिकतम 25 करोड़ रुपये स्टाम्प शुल्क कर दिया गया है जिसका पहले प्रावधान नहीं था।
दूसरा संशोधन क्षतिपूर्ति बंध पत्र यानी इंडेमिनिटी बांड संबंध में किया गया है जिसमें पहले प्रावधान था कि इस पर 500 रुपये स्टाम्प शुल्क लिया जायेगा परन्तु अब संशोधन कर एक हजार रुपये स्टाम्प शुल्क कर दिया गया है।
तीसरा संशोधन कुटुम्ब के सदस्य के पक्ष में हक छोडऩे के संबंध में तैयार विलेख पर स्टाम्प शुल्क के बारे में है। पहले प्रावधान था कि ऐसे विलेख पर छोड़े गये हक की सम्पत्ति के बाजार मूल्य के 5 प्रतिशत के बराबर स्टाम्प शुल्क लगेगा लेकिन अब संशोधन कर स्टाम्प शुल्क 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तीन मदों में स्टाम्प शुल्क में संशोधन किया गया है। कंपनियों के विलिनीकरण के अंतर्गत स्थाई सम्पत्तियों के अंतरण पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क की अधिकतम सीमा नहीं थी जिससे ऐसे मामलों में स्टाम्प शुल्क अधिक लग रहा था। इसीलिये अब अधिकतम सीमा 25 करोड़ रुपये कर दी गई है।
- डॉ नवीन जोशी

राज्य सरकार ने किया स्टाम्प शुल्क में संशोधन
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Bhopal 👤By: DD Views: 19082
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