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वायरस के संक्रमण और ब्रेन कैंसर की प्रगति के बीच के बिंदुओं को जोड़ना

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वायरस के संक्रमण और ब्रेन कैंसर की प्रगति के बीच के बिंदुओं को जोड़ना
इंदौर 12 जुलाई 2022। वैज्ञानिकों ने पाया है कि कैंसर पैदा करने वाला वायरस एपस्टीन बार वायरस (ईबीवी) न्यूरोनल कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है और फैटी एसिड, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन घटकों जैसे बायोमोलेक्यूल्‍स में विभिन्न परिवर्तन कर सकता है, जिससे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के साथ-साथ मस्तिष्क कैंसर के रोग भी हो सकते हैं।

ईबीवी वायरस मानव आबादी में व्यापक रूप से मौजूद पाया गया है। यह आमतौर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है, लेकिन कुछ असामान्य स्थितियों जैसे प्रतिरक्षाविज्ञानी तनाव या प्रतिरक्षा क्षमता में कमी में वायरस शरीर के अंदर पुन: सक्रिय हो जाता है। यह आगे चलकर विभिन्न जटिलताओं को जन्म दे सकता है जिसमें एक प्रकार का रक्त कैंसर (जिसे बुर्किट का लिंफोमा कहा जाता है) पेट का कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस, और इसी तरह की बीमारियां शामिल हैं। पहले के अध्ययनों ने विभिन्न न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों में ईबीवी की भागीदारी के लिंक प्रदान किए थे। हालांकि, यह वायरस मस्तिष्क की कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करता है और उनमें हेरफेर कर सकता है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है।

आईआईटी इंदौर की एक शोध टीम ने मस्तिष्क कोशिकाओं पर कैंसर पैदा करने वाले वायरस के संभावित प्रभावों का पता लगाने के लिए एफआईएससी योजना के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित रमन माइक्रोस्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया। जैविक नमूनों में संवेदनशील रासायनिक परिवर्तनों को खोजने के लिए रमन प्रभाव पर आधारित तकनीक एक सरल, लागत प्रभावी उपकरण है।

एसीएस केमिकल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि वायरल प्रभाव के तहत न्यूरोनल कोशिकाओं में विभिन्न बायोमोलेक्यूल्स में समय पर और क्रमिक परिवर्तन हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अन्य सहायक मस्तिष्क कोशिकाओं (यानी, एस्ट्रोसाइट और माइक्रोग्लिया) में देखे गए परिवर्तनों की तुलना में ये परिवर्तन कुछ अलग थे।

इस टीम में आईआईटी इंदौर में इंफेक्शन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप के लीडर, डॉ. हेम चंद्र झा और उनके छात्रों ओमकार इंदारी, श्वेता जखमोला और मीनाक्षी कांडपाल के साथ मैटेरियल एंड डिवाइस लेबोरेटरी (भौतिकी विभाग) के ग्रुप लीडर के प्रोफेसर राजेश कुमार और डॉ. देवेश के पाठक और सुश्री मनुश्री तंवर सहित टीम ने यह पाया कि इन कोशिकाओं में कई बार कुछ सामान्य बायो-मोलेक्यूलर परिवर्तन देखे गए थे। उन्होंने देखा कि वायरल प्रभाव के तहत कोशिकाओं में लिपिड, कोलेस्ट्रॉल, प्रोलाइन और ग्लूकोज अणुओं में वृद्धि हुई है। ये बायो-मोलेक्यूलर संस्थाएं अंततः कोशिकाओं के वायरल हड़पने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा, अध्ययन ने यह भी दिशा प्रदान की है कि क्या इन बायो-मोलेक्यूलर परिवर्तनों को वायरस से जुड़े प्रभावों और तंत्रिका संबंधी जटिलताओं से जोड़ा जा सकता है।

डॉ. हेम चंद्र झा ने कहा, "शोध कार्य केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विभिन्न डिब्बों में ईबीवी-मध्यस्थ बायो-मोलेक्यूलर परिवर्तनों को समझने में सहायता करता है, जिससे तंत्रिका तंत्र की बीमारियों की बेहतर समझ उपलब्‍ध होती है।"

प्रोफेसर राजेश कुमार ने बताया कि क्लिनिकल सेटिंग्स में वायरस से जुड़ी सेलुलर जटिलताओं पर अध्ययन करने में, एक लागत प्रभावी और गैर-आक्रामक तकनीक, रमन माइक्रोस्पेक्ट्रोस्कोपी के लाभों को स्थापित करने में भी यह अध्ययन काफी सहायक है। यह अन्य तकनीकों की तुलना में नैदानिक ​​नमूनों का विश्लेषण करने में भी सहायता प्रदान कर सकता है, जिसके लिए कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों में वायरस से जुड़े परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए उन्नत सेटअप की आवश्यकता होती है।

प्रकाशन लिंक:

https://pubs.acs.org/doi/full/10.1021/acschemneuro.2c00081
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