🔴 TRENDING NOW!
आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि कालड़ी में मोरारी बापू की रामकथा ताज लेकफ्रंट में सतपुड़ा के पारंपरिक व्यंजनों का सात दिवसीय फूड फेस्टिवल संपन्न मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र, स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से मिला 10 हितग्राहियों को मालिकाना हक AI से आगे सुपरइंटेलिजेंस की दुनिया: क्या .si डोमेन बन सकता है डिजिटल पहचान का नया विकल्प? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिया सख्त एक्शन, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग निलंबित AI एजेंट्स में भी जेंडर बायस: एक ही काम के लिए महिला एजेंट को पुरुष से 10.25% कम भुगतान मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं संस्थानों का सम्मान जमीन से आसमान तक जियो, 1,600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन के साथ कनेक्टिविटी की नई छलांग भारत में AI रेगुलेशन की तैयारी: एक महीने में आएगा कंसल्टेशन पेपर, Deepfake और साइबर सुरक्षा पर फोकस भारत में Starlink की देरी पर मस्क का बड़ा आरोप, ‘ओलिगार्क्स’ पर लगाया रोकने का आरोप

55 वर्षीय ज्योति रात्रे: अंटार्कटिका की चुनौती स्वीकार

👤
prativad
👁 1727 व्यूज
📍 भोपाल
55 वर्षीय ज्योति रात्रे: अंटार्कटिका की चुनौती स्वीकार
8 दिसंबर 2024। उम्र सिर्फ एक संख्या है, और ज्योति रात्रे इसे साबित कर रही हैं। 55 वर्ष की इस मध्य प्रदेश की महिला पर्वतारोही ने अब तक पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया है। अब उनका लक्ष्य है अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी, माउंट विंसन को फतह करना।

सेवन समिट मिशन के करीब
ज्योति का अंतिम लक्ष्य है सेवन समिट मिशन को पूरा करना, जिसमें सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करना शामिल है। माउंट विंसन, 4,892 मीटर की ऊंचाई के साथ, इस मिशन का अंतिम पड़ाव है। ज्योति 13 दिसंबर को भोपाल से रवाना होंगी और 18 दिसंबर को विशेष विमान से अंटार्कटिका पहुंचने की योजना है।


ज्योति रात्रे, अंटार्कटिका, माउंट विंसन, पर्वतारोही, सेवन समिट मिशन, मध्य प्रदेश, साहसिक कार्य, हिमालय, एक्सपेडिशन, भारतीय पर्वतारोही, Jyoti Rathore, Antarctica, Mount Vinson, Mountaineer, Seven Summits Mission, Madhya Pradesh, Adventure, Himalayas, Expedition, Indian Mountaineer

कठोर परिस्थितियों का सामना
अंटार्कटिका का मौसम बेहद कठोर है, तापमान -30°C से -60°C तक गिर जाता है। इसके बावजूद, ज्योति ने कड़ी मेहनत और समर्पण से खुद को तैयार किया है। उन्होंने प्राणायाम, आइस बाथ और भोपाल की पहाड़ियों पर चढ़ाई जैसी कठिन कसरतें की हैं।

परिवार का समर्थन और आर्थिक चुनौतियाँ

ज्योति के पति, केके रात्रे, ने उनके इस साहसिक सफर में पूरा समर्थन दिया है। हालांकि, इस तरह के अभियानों में काफी खर्च होता है। माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई में ही 30 लाख रुपये से अधिक का खर्च आया था, और माउंट विंसन के लिए बजट 60 लाख रुपये है।

एक प्रेरणा
ज्योति रात्रे की कहानी सिर्फ एक साहसिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह उम्र और परिस्थितियों को चुनौती देने का प्रमाण है। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयास उन्हें एक प्रेरणा स्रोत बनाते हैं।
Tags :