1 जनवरी 2026। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा विवादों में घिर गई हैं। ऑल इंडिया जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके खिलाफ फतवा जारी करते हुए इसे शरीयत के खिलाफ बताया है। इस बयान के बाद मामला धार्मिक बहस से निकलकर सियासी प्रतिक्रिया तक पहुंच गया है।
मंदिर दर्शन को बताया शरीयत के विरुद्ध
नुसरत भरूचा मंगलवार को महाकालेश्वर मंदिर पहुंची थीं, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भी शामिल हुईं। इसी को लेकर मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि किसी दूसरे धर्म की धार्मिक परंपराओं में शामिल होना इस्लामी उसूलों के खिलाफ है। उनके अनुसार मंदिर में पूजा, जल अर्पण, तिलक लगाना और अन्य धार्मिक क्रियाएं शरीयत की नजर में गुनाह हैं। उन्होंने नुसरत से तौबा करने और कलमा पढ़ने की बात कही।
#WATCH | Bareilly, Uttar Pradesh: On Nusrat Bharucha's visit to Mahakal Temple, National President, All India Muslim Jamaat, Maulana Shahabuddin Razvi Barelvi says, "... Nusrat Bharucha visited the Mahakal Temple in Ujjain, where she performed puja rituals. According to Sharia,… pic.twitter.com/EpAfc0gaM4
— ANI (@ANI) December 31, 2025
अन्य धर्मगुरुओं की भी प्रतिक्रिया
भोपाल के मुफ्ती रईस अहमद कसमी ने भी बयान देते हुए कहा कि इस्लाम में केवल एक अल्लाह की इबादत की अनुमति है और मूर्ति पूजा की कोई जगह नहीं है। उनके मुताबिक, नुसरत के खिलाफ जारी फतवा सोच-समझकर दिया गया फैसला होगा।
बीजेपी ने संविधान का हवाला दिया
इस पूरे मामले पर बीजेपी प्रवक्ता डॉ. वाणी अहलुवालिया ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को आने-जाने और अपनी आस्था व्यक्त करने की पूरी आजादी देता है। धर्म या जाति के नाम पर फतवा जारी करना सही नहीं है और हर व्यक्ति को अपने विश्वास के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है।
कांग्रेस ने जताई दूरी
कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने कहा कि संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता देता है और कांग्रेस इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करती। उन्होंने फतवे को मौलाना की निजी सोच बताया और कहा कि पार्टी सभी धर्मों का सम्मान करती है।
पहले भी कर चुकी हैं महाकाल दर्शन
नुसरत भरूचा ने मंदिर में काफी समय बिताया था। नंदी हाल में बैठकर प्रार्थना करती उनकी तस्वीरें भी सामने आई थीं। उन्होंने दर्शन व्यवस्था की सराहना की और हर साल महाकाल दर्शन की इच्छा जताई थी। यह उनका दूसरा महाकाल दौरा बताया जा रहा है।
फिलहाल नुसरत भरूचा की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आस्था को लेकर नई बहस जरूर छेड़ गया है।














