1 फरवरी 2026। केंद्र और राज्य दोनों में एक ही दल की सरकार होने के बावजूद मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों के बंटवारे में बड़ी राहत नहीं मिल पाई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में 2,785 करोड़ रुपये अधिक मिलने का अनुमान जरूर है, लेकिन यह बढ़ोतरी पहले की उम्मीदों के मुकाबले काफी कम मानी जा रही है।
दरअसल, वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय करों से प्रदेश को 1,11,662 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था। लेकिन केंद्र के पुनरीक्षित बजट में यह घटकर 1,09,348 करोड़ रुपये रह गया। यानी इसी वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश को करीब 2,314 करोड़ रुपये कम मिलने तय हैं। ऐसे में अगले वर्ष की 2,785 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को सरकार के लिए सिर्फ एक मामूली राहत माना जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में करीब 1,12,133 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। जबकि राज्य सरकार की उम्मीद थी कि यह आंकड़ा 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा। आर्थिक जानकारों के मुताबिक इस अंतर की बड़ी वजहें वर्ष 2025-26 में लागू की गई नई जीएसटी दरें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही आर्थिक अस्थिरता हैं, जिनका सीधा असर कर संग्रह पर पड़ा है।
प्रदेश में विकास योजनाओं की रफ्तार काफी हद तक केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और राज्य के स्वयं के कर राजस्व पर निर्भर है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास स्वतंत्र रूप से नए कर लगाने के विकल्प सीमित हो गए हैं। ऐसे में केंद्र से मिलने वाला कर हिस्सा राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए पहले से कहीं अधिक अहम हो गया है। मध्य प्रदेश को यह हिस्सा 7.34 प्रतिशत की दर से मिलता है।
वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय सहायता अनुदान के मोर्चे पर भी स्थिति पूरी तरह अनुकूल नहीं दिख रही। 2026-27 में केंद्रीय सहायता अनुदान 48,661 करोड़ रुपये से कम रह सकता है। केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्रांश की राशि करीब 47 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान है।
इसका सीधा असर राज्य के वित्तीय बोझ पर पड़ने वाला है। खासकर ‘विकसित भारत जी-राम-जी योजना’ जैसी योजनाओं में अब राज्य को पहले की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक राशि स्वयं जुटानी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राज्य सरकार को या तो अपने खर्चों की प्राथमिकताएं बदलनी होंगी या फिर अतिरिक्त संसाधन जुटाने के नए रास्ते तलाशने होंगे।














