इंदौर 2 जनवरी 2026। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की है।
लापरवाही पर गिरी गाज
अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। साथ ही नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा और अपर आयुक्त को इस गंभीर लापरवाही के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इंदौर में दूषित पेयजल प्रदाय से हुई दुखद घटना के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के उपरांत प्रदेश के अन्य स्थानों के लिए भी हम सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए हैं।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 2, 2026
इस दृष्टि से सभी 16 नगर…
इसके अलावा, जल वितरण कार्य से जुड़े प्रभारी अधीक्षण यंत्री से भी तुरंत प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नगर निगम में जो अहम पद लंबे समय से खाली हैं, उन पर तुरंत नियुक्ति की जाए ताकि व्यवस्थाएं दुरुस्त हो सकें।
“जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है और लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि जवाबदेही की परीक्षा भी बन गया है। सरकार ने संकेत दे दिए हैं कि आगे और कार्रवाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता।














