14 जनवरी 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र–राज्य के मजबूत समन्वय से देश और मध्यप्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (PMG) और प्रगति (Pro-Active Governance and Timely Implementation) जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए वर्षों से अटकी निवेश परियोजनाओं को फिर से सक्रिय किया गया है और निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री निवास में मीडिया से संवाद के दौरान कहा कि पहले बड़ी परियोजनाएं कागजों में ही दम तोड़ देती थीं, लेकिन अब हर परियोजना की प्रगति, बाधा और समाधान की सीधी निगरानी हो रही है। नतीजा यह है कि दशकों से लंबित योजनाएं अब तय समय में पूरी हो रही हैं। उन्होंने मीडिया कर्मियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रगति प्लेटफॉर्म पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
मध्यप्रदेश को 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के माध्यम से मध्यप्रदेश में 209 बड़ी परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। इनमें से 2.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 108 केंद्रीय परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 5.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत की 101 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। केंद्रीय परियोजनाओं में प्रदेश ने 97 प्रतिशत सफलता दर हासिल की है।
इनमें रेल मंत्रालय की 14, सड़क परिवहन की 13, विद्युत की 5 और नवकरणीय ऊर्जा से जुड़ी अहम परियोजनाएं शामिल हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीता परियोजना, धार का पीएम मित्र पार्क और वन्यजीव पर्यटन योजनाएं भी केंद्र–राज्य समन्वय का उदाहरण हैं।
परिणामोन्मुख शासन की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शासन को सिर्फ प्रक्रियात्मक नहीं, बल्कि परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाया है। पीएमजी और प्रगति के माध्यम से “घोषणा नहीं, डिलीवरी” का मॉडल जमीन पर उतरा है। अब समय, लागत और भरोसे तीनों स्तर पर देश ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय विकास के लिए सभी राज्यों का समान महत्व है। केन–बेतवा नदी जोड़ो परियोजना सहित तीन नदी परियोजनाओं पर अब तेजी से काम हो रहा है।
रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूती
मुख्यमंत्री ने बताया कि 285 किमी लंबी जबलपुर–गोंदिया रेल गेज परिवर्तन परियोजना से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और अधिक क्षमता वाला रेल संपर्क बना है। इससे जबलपुर, बालाघाट, मंडला और सिवनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी नागपुर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से बढ़ी है। इसके अलावा 18.5 हजार करोड़ रुपये की इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन का लाभ उज्जैन को भी मिलेगा।
प्रगति प्लेटफॉर्म से 97% समस्याओं का समाधान
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि प्रगति प्लेटफॉर्म की शुरुआत 25 मार्च 2015 को हुई थी और इसकी 50वीं बैठक 31 दिसंबर 2025 को संपन्न हुई। मध्यप्रदेश में पीएमजी पोर्टल के तहत 209 परियोजनाओं की निगरानी हो रही है। समीक्षा में सामने आए 322 मुद्दों में से 312 और प्रगति प्लेटफॉर्म पर उठे 124 मुद्दों में से 120 का समाधान किया जा चुका है। कुल मिलाकर राज्य ने 97 प्रतिशत समस्याओं का समाधान किया है।
उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। सड़क, रेल और ऊर्जा परियोजनाओं के चलते प्रदेश तेजी से ऊर्जा और परिवहन हब के रूप में उभर रहा है।














