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मध्य प्रदेश विधानसभा: गोवंश से लेकर कोल माइंस और भोपाल मास्टर प्लान तक, आठवें दिन तीखी नोकझोंक

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 88

25 फरवरी 2026। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन शोरगुल और आरोप प्रत्यारोप के नाम रहा। निराश्रित गोवंश, सिंगरौली की कोल माइंस, मास्टर प्लान में देरी और हाल के पुल विवादों पर सत्ता और विपक्ष आमने सामने रहे।

इंदौर और भोपाल मास्टर प्लान पर सियासत
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना था कि मंत्री स्तर पर फाइल मुख्यमंत्री के पास अटकी है और विभागीय तालमेल की कमी से शहर का विकास रुका हुआ है।

इस बीच भोपाल के मास्टर प्लान पर हुजूर से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने स्पष्ट किया कि राजधानी का प्लान मेट्रोपोलिटन क्षेत्र की अवधारणा के अनुरूप जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान और उससे जुड़ी पूरी रणनीति तैयार है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा सदन में इसकी विस्तृत जानकारी दी जा चुकी है।

रामेश्वर शर्मा के मुताबिक भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने का रोडमैप तैयार है। नए मास्टर प्लान में मंडीदीप, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और रायसेन जैसे आसपास के क्षेत्रों को भी शामिल कर क्षेत्रीय संतुलित विकास की योजना बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य भोपाल को उद्योग, रोजगार, मेडिकल और एजुकेशन हब के रूप में विकसित करना है, जहां मेट्रो और अन्य बुनियादी सुविधाएं एकीकृत ढांचे में उपलब्ध हों।

पुलों पर विपक्ष का हमला
तराना विधायक महेश परमार ने पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के कार्यकाल में बने पुलों को लेकर सरकार को घेरा। भोपाल में 90 डिग्री एंगल वाले पुल का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि यदि डिजाइन सही था तो संबंधित अधिकारियों को निलंबित क्यों किया गया। उनका आरोप था कि तकनीकी खामियों को बाद में प्रशासनिक कार्रवाई से ढंका जा रहा है।

निराश्रित गोवंश से किसान परेशान
कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने कहा कि किसान फसल की रखवाली करें या सड़कों और खेतों में घूम रहे निराश्रित गोवंश को संभालें। विधायक हेमंत कटारे ने दावा किया कि कई जगह किसान मजबूरी में खेतों में करंट लगा देते हैं, जिससे गोवंश के साथ साथ बच्चों की जान भी खतरे में पड़ती है।

पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने जवाब में बताया कि 25 जिलों में बड़ी गौशालाओं के लिए जमीन चिन्हित की गई है। जबलपुर, रायसेन, दमोह, सागर, अशोकनगर, खरगोन और रीवा में टेंडर प्रक्रिया जारी है। सरकार का कहना है कि एक स्थल पर कम से कम 5 हजार गोवंश रखने की क्षमता होगी। फिलहाल राज्य में करीब 10 लाख निराश्रित गोवंश हैं, जिनमें से लगभग 4 लाख को नई व्यवस्था में लाने का लक्ष्य है।

सिंगरौली में कोल माइंस और अदाणी पर बहस
सिंगरौली में कोल माइंस के लिए पेड़ कटाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर उद्योग समूहों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। भाजपा की ओर से जवाब दिया गया कि खदान आवंटन नीलामी प्रक्रिया से होता है और वहां Adani Group के अलावा Essar Group, Jaiprakash Associates और Northern Coalfields Limited भी काम कर रही हैं। सत्तापक्ष का तर्क था कि बिना कोयले के बिजली और बिना बिजली के उद्योग और पानी की आपूर्ति संभव नहीं है। असली मुद्दा विस्थापन और मुआवजे का है, जिस पर सरकार काम कर रही है।

आठवें दिन की कार्यवाही ने साफ कर दिया कि विकास, पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही तीनों मुद्दे इस बजट सत्र में केंद्र में रहेंगे। भोपाल के मेट्रोपोलिटन मास्टर प्लान से लेकर गांवों में फसल बचाने की जद्दोजहद तक, सरकार के सामने नीति और जमीन की हकीकत के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में सदन की गरमी और बढ़ने के संकेत साफ हैं।

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