11 फरवरी 2026। भारत ने अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की योजना पर रफ्तार बढ़ा दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एजेंसी इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।
ISRO के प्रोग्राम डायरेक्टर इम्तियाज़ अहमद ने IANS से बातचीत में कहा कि गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन को सपोर्ट करने के लिए 80 सैटेलाइट्स पर काम चल रहा है। ये सैटेलाइट मिशन के दौरान ज़रूरी सिग्नल और डेटा पृथ्वी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस समय ISRO के कई प्रमुख कार्यक्रम एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। इनमें अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन, नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NVS), इंडियन डेटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (IDRSS), गगनयान मिशन और प्रस्तावित वीनस ऑर्बिटर मिशन शामिल हैं। इन परियोजनाओं का मकसद अंतरिक्ष विज्ञान, खोज और व्यावहारिक तकनीक के क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत करना है।
एजेंसी ने 2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इस स्टेशन के पांच मॉड्यूल में से पहला मॉड्यूल 2028 तक कक्षा में स्थापित करने की योजना है।
गगनयान मिशन के तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को तीन दिन की अवधि के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाएगी। ISRO प्रमुख वी. नारायणन के मुताबिक यह मिशन 2027 के लिए प्रस्तावित है। इससे पहले तीन बिना मानव वाले परीक्षण मिशन किए जाएंगे।
ISRO लो अर्थ ऑर्बिट में फिजिकल डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावना पर भी अध्ययन कर रहा है। भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखते हुए अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
हाल ही में भारत ने अपना अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह लॉन्च किया। ISRO के हेवी-लिफ्ट रॉकेट ने अमेरिका की कंपनी AST स्पेसमोबाइल के लिए ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया।
आगे की रणनीति भी साफ है। ISRO अगले तीन वर्षों में अपने वार्षिक स्पेसक्राफ्ट उत्पादन को तीन गुना करने की तैयारी में है। साथ ही, भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जिसका वर्तमान आकार लगभग 8.2 बिलियन डॉलर है, उसे 2033 तक 44 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष में उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां अपनी स्थायी भूमिका तय करने की तैयारी कर रहा है।
फ़ोटो: भारत के स्पेस स्टेशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के मॉडल और स्कीमैटिक की फ़ाइल फ़ोटो। © फ़ोटो पल्लव बागला/गेटी इमेजेज़ द्वारा














