बायलॉजी ग्रेजुएट्स पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ेगी...

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: DD                                                                         Views: 363

Bhopal: यौन शोषण के प्रकरणो के बढ़ने के बाद लिया फ़ैसला

मप्र पुलिस पॉक्सो एक्ट को लेकर गम्भीर

21 अक्टूबर 2020। यौन शोषण के मामलों में डीएनए रिपोर्ट समय पर नहीं मिल रही है। इसलिये यह काम तेजी से हो इसके लिये जीव विज्ञान यानि बॉयोलॉजी में ग्रेज्युएट पुलिसकर्मियों की तैनाती की जायेगी।
पुलिस मुख्यालय में एडीजी तकनीकी सेवायें अनिल कुमार गुप्ता ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों, विसबल के सेनानियों एवं रेल पुलिस अशीक्षकों को निर्देश जारी कर कहा है कि महिलाओं एवं बालकों के विरुध्द यौन शोषण/बलात्संग के प्रकरणों तथा पॉक्सो एक्ट के परिपेक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट दिल्ली तथा हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा समय-समय पर पारित निर्णयों में याौन शोषण के प्रकरणों का डीएनए परीक्षण अनिवार्य किया गया है तथा समय-सीमा में परीक्षण रिपोर्ट देने के लिये कहा गया है।
एडीजी ने अपने निर्देश में आगे कहा है कि वर्तमान में एफएसएल सागर एवं आरएफएसएल भोपाल की डीएनए परीक्षण लैब में प्रकरणों की आवक संख्या में अप्रत्याशित रुप से बढ़ौत्तरी हुई है। वर्तमान में इन दोनों लैब की क्षमता कम होने एवं मानव बल की कमी के कारण सभी प्रकरणों का निराकरण तीव्रता से नहीं हो पा रहा है। इस हेतु पुलिस मुख्यालय एवं एफएसएल स्तर पर अराजपत्रित तकनीकी स्टाफ के रिक्त पदों की भर्ती के प्रयास युध्द स्तर पर जारी हैं जिसकी पूर्ति में समय लगने की संभावना है। इसलिये तात्कालिक व्यवस्था के अंतर्गत आप अपनी इकाई में ऐसे इच्छुक आरक्षक/प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारी, जो जीव विज्ञान (बॉयोलॉजी) या संबंधित विषय में ग्रेज्युएट उपाधि प्राप्त हों, के नाम भेजें जिनकी इन दोनों लैब में नियुक्ति की जा सके।

सिमी बंदियों की भूख हड़ताल पर राष्ट्रीय मानव
अधिकार आयोग ने सीएस-डीजीपी से की रिपोर्ट तलब

भोपाल।राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद छह सिमी बंदियों द्वारा भूख हड़ताल करने के मामले में मप्र के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और डीजीपी विवेक जौहरी से चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।
आयोग ने भेजे अपने नोटिस में कहा है कि भूख हड़ताल के बाद सिमी बंदियों को जेल अस्पताल में दाखिल किया गया है। इन बंदियों को विभिन्न मामलों में कोर्ट से सजा मिली हुई है और ये कानूनी हिरासत में जेल में हैं और इन्हें भोजन का अधिकार है।


- डॉ. नवीन जोशी/PNI

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