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विदेश में हुआ अपराध, भारत में दर्ज FIR वैध; हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 355

जबलपुर 5 जनवरी 2026। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विदेश में हुए कथित अपराध के मामले में भारत में दर्ज एफआईआर को शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने पति और उसके माता-पिता की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया।

मामला भोपाल निवासी दंपती से जुड़ा है, जो शादी के बाद जापान में रह रहे थे। वहां दोनों के बीच विवाद हुआ। महिला बाद में भारत लौट आई और पति तथा सास-ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट सहित अन्य आरोप लगाते हुए महिला थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि कथित अपराध विदेश में हुआ है, इसलिए भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 के तहत केंद्र सरकार की अनुमति के बिना जांच नहीं हो सकती। वहीं, महिला पक्ष ने कहा कि प्रारंभिक जांच के लिए ऐसी अनुमति आवश्यक नहीं है।

हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला अभी प्रारंभिक जांच के स्तर पर है। पुलिस ने केवल एफआईआर दर्ज की है, न तो चार्जशीट दायर हुई है और न ही ट्रायल कोर्ट ने कोई संज्ञान लिया है। ऐसे में एफआईआर निरस्त नहीं की जा सकती।

अदालत ने यह भी माना कि रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता का आरोप है कि प्रताड़ना सिर्फ जापान में नहीं, बल्कि भारत लौटने के बाद भी हुई। कोर्ट के मुताबिक, धारा 188 के तहत केंद्र सरकार की अनुमति संज्ञेय अपराध के ट्रायल स्टेज पर आवश्यक होती है, न कि जांच के शुरुआती चरण में।

इन आधारों पर हाई कोर्ट ने पति और उसके माता-पिता की याचिका खारिज कर दी।

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